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नई दिल्ली – पिछले दिनों सऊदी अरब का नाम ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले में सऊदी का हाथ’ ख़ुफ़िया रिपोर्ट में घसीटे जाने से नाराज़ सऊदी सरकार ने साफ़ कर दिया है की अगर कांग्रेस ने वह बिल पास कर दिया जिसके तहत 9/11 हमले के लिए सऊदी सरकार को जिम्मेदार ठहराने की अनुमति अमेरिकी अदालतों को मिल जाएगी तो वह सारे अमेरिकी असेट्स बेच देगा। सऊदी अरब की इस धमकी का अमेरिका पर गहरा असर देखने को मिल रहा है।

एक ओर ओबामा प्रशासन ने संबंधित बिल को रोकने के लिए संसद में लॉबिंग शुरू कर दी है तो दूसरी ओर पिछले कुछ सप्ताह से इस मुद्दे पर सांसदों और गृह विभाग तथा पेंटागन के अधिकारियों के बीच गंभीर बहस चल रही है। अधिकारियों ने सिनेटरों को कानून की वजह से संभावित राजनयिक और आर्थिक बखेड़ों के प्रति सचेत किया है।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल अल जुबेर पिछले महीने वॉशिंगटन दौरे पर थे। तभी उन्होंने खुद किंगडम के संदेश से अमेरिका को वाकिफ करा दिया था। उन्होंने अमेरिकी सांसदों से साफ कह दिया था कि सऊदी अरब ट्रेजरी सिक्यॉरिटीज में रखे 750 अरब डॉलर समेत दूसरे असेट्स बेचने पर मजबूर हो जाएगा, इससे पहले कि इन्हें अमेरिकी कोर्ट द्वारा फ्रीज करने का खतरा पैदा हो जाए।

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हालांकि, कई बाहरी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सऊदी अरब सिर्फ धमकी दे रहा है। उसके लिए ऐसा करना बहुत कठिन होगा क्योंकि अमेरिकी असेट्स बेचने से वहां की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। लेकिन, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह धमकी सऊदी अरब और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है।

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