عبدالفتاح السيسي

जार्डन के मंत्री ने मिस्र के राष्ट्रपति तक सऊदी अरब का धमकी भरा संदेश पहुँचा दिया है जिसमें कहा गया हैः अगर तीरान और सनाफ़ीर द्वीपों को सऊदी अरब को न दिया गया तो (फ़ारस की) खाड़ी सहयोग परिषद आपको एक क़तर भी तेल नहीं बेचेगी।


ओमान से छपने वाले समाचार पत्र अलदस्तूर ने लिखा कि जार्डन के मीडिया मंत्री डॉक्टर मोहम्मद अलमोमिनी ने क़ाहेरा  की अप्रत्याशित यात्रा करके विदेश मंत्री सामेह शुकरी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह सीसी से अलग अलग मुलाक़ात करके क्षेत्री मामलों विशेषकर क़ाहेरा-रियाज़ के संकट के बारे में बातचीत की।
इस समाचार पत्र के अनुसार जार्डन के मंत्री ने सऊदी अरब की अंतिम वार्निंग को मिस्र के अधिकारियों के तक पहुँचा दिया है और सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजबीर इस मौखिक संदेश को पहुँचा दिया है कि अगर मिस्र तीरान और सनाफ़ीर द्वीपों के संबंध में सऊदी अरब की बात को नहीं मानता है तो सऊदी अरब और (फ़ारस की) खाड़ी के देश पूर्ण रूप से तेल और तेल ने निर्मित चीज़ों का निर्यात मिस्र को बंद कर देंगे।
अल-अहरम अध्ययन केंद्र के विशेषज्ञ डॉक्टर उमर अलशूबकी का मानना है कि सऊदी अरब द्वारा तीरान और सनाफ़ीर द्वीपों को पा लेने के तर्कहीन जुनून का कारण मोहम्मद बिन सलमान का वह सपना है जिसे 2030 आउटलुक कहा जा रहा है, क्योंकि राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान के अनुसार यह दो द्वीप सऊदी अरब की बीमार हो चुकी अर्थ व्यपस्था को पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण रोल अदा कर सकते हैं।
उन्होंन कहाः इस मामले में हमको इस्राईल की भूमिको को भी नहीं भूलना चाहिए, इस्राईल ने सीधे रियाज़ से यह मांग की है कि इन दो द्वीपों को कंट्रोल अपने हाथ में ले ले, ताकि इलियट बंदरगाह के बंद हो जाने के डरावना दुःस्वप्न और लाल सागर में इस्राईली नौकाओं के ख़तर में पड़ जाने, जैसा कि अब्दुल नारिस के युग में हुआ था, को एक ही बार में हमेशा के लिए समाप्त कर सके।
जनवरी के अंत में जनरल अब्दुल फ़त्ताह सीसी ने अपने भाषण में अप्रत्याशित रूप से कहा था कि मिस्र केवल ख़ुदा के सामने सर झुकाएगा और मिस्रियों के सम्मान को पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता है।
क़ाहेरा सऊदी अरब की धमकी के बाद बेकार नहीं बैठा है बल्कि वह अपने तेल की आवश्यकताओं के लिए दूसरे स्रोतों को तलाश रहा है, इसी के अंतर्गत इराक़ के राष्ट्रपति हैदर अलएबादी की सरकार और मिस्र के विदेश मंत्री सामेह अलशुकरी की बीच इस संबंध में गंभीर बातचीत हुई है और मिस्र सऊदी अरब के तेल के विकल्प के ताश में है।
इस आधार पर सऊदी विदेश मंत्री आदिल अलजबीर की बग़दाद यात्रा को बग़दाद-क़ाहेरा के बीच तेल समझौते को रोके जाने के पूर में परिभाषित किया जा सकता है।
इराकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोवफ़्फ़क़ अलरबीई ने एक साक्षात्कार में दावा किया है कि सऊदी अरब क़ाहेरा पर दबाव बनाने और बग़दाद-क़ाहेरा के बीच किसी भी प्रकार के तेल समझौते को रोकने के लिए कुवैत सरकार की मध्यस्थता के साथ इराक़ को विवादास्पद खोर अब्दुल्लाह (जिसमें तेल का एक बड़ा भंडार मौजूद है) को इराक़ को देने के लिए तैयार है।


शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें