सऊदी अरब के झंडे से कलमा ए तैयबा के नीचे बनी तलवार की छवि को हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया। जिसकी न केवल सऊदी अरब में बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया में आलोचना हो रही है।

झंडे से तलवार की छवि को हटाने का यह सुझाव सऊदी लेखक फहद आमेर अल-अहमदी ने ट्विटर पर दिया। उनका मानना है कि छवि राज्य की वर्तमान नीतियों से मेल नहीं खाती है।

अल-अहमद ने लिखा, “मेरा सुझाव है कि हमारे सऊदी झंडे से तलवार को हटा दें।” उन्होने कहा, “पहला कि यह इस दिन और उम्र में अच्छा नहीं होता है। दूसरा, यह ‘धर्म में कोई बाध्यता नहीं है’ के खिलाफ जाता है। तीसरा, इसे हटाने से हिंसा की हमारी निंदा सक्रिय रूप से होगी। हमारे धर्म के खिलाफ दावों को मार रहा है। ”

उन्होंने कहा कि सऊदी ध्वज को पहले ही छह बार बदल दिया गया था और दो संस्करणों में तलवार की छवि नहीं थी।

इस पर प्रिंस सत्तम बिन खालिद अल-सऊद ने कहा कि तलवार ताकत का प्रतिनिधित्व करती है न कि हिंसा का। “तलवार ताकत और न्याय का प्रतीक है और सऊदी इतिहास का अभिन्न अंग है।”

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