सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने ‘उग्रवाद’ और ‘कट्टरपंथ’ को दूर करने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने की मांग की है उन्होंने स्कूली बच्चों को फोटो और वीडियो लेने के लिए प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिससे “राज्य अब इस्लाम के लिए काम करेगा.” सऊदी अब इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार नज़र आ रहा है. सऊदी अरब की स्कूल व्यवस्था ने ऐसे पाठ्यक्रम का स्कूलों में चलाने पर सख्त नाराज़गी ज़ाहिर की है जो गैर-मुसलमानों के प्रति नफरत को बढ़ावा देती है.

लेकिन इस पहल को स्थगित कर दिया गया है और इसके भविष्य के अनिश्चितता के आरोपों के बाद इस परियोजना को इस्लामवादियों ने रोक दिया था. अक्टूबर में कार्यक्रम के पहले प्रमुख को मीडिया रिपोर्टों के बाद खारिज कर दिया गया था कि उनके स्टाफ ने मुस्लिम भाईचारा के साथ सहानुभूति ज़ाहिर की थी, इस “मुस्लिम भाईचारा” आंदोलन को रियाद ने एक आतंकवादी समूह का नाम दिया था.

शिक्षा प्रणाली को एक ऐसे पाठ्यक्रम को बनाने लिए उनकी बहुत आलोचना हुई है जो गैर-मुस्लिमों के नफरत को बढ़ावा देती है. उग्रवाद और कट्टरपंथ को पनपने के लिए शुरू से ही बच्चो के दिमाग में यह बीज बो दिया जाता है. प्रणाली की जांच और ताकतवर वहाबी धार्मिक प्रतिष्ठान के प्रभाव जो सुन्नी इस्लाम की  सख्त व्याख्या का उपदेश देता है. अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के हमलों में किए गए 19 अपहरणकर्ताओं में से 15 आरोपी सऊदी के थे.

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा के आधुनिकीकरण और असहिष्णुता से आज़ाद होने के लिए पाठ्यपुस्तकों में बड़ा बदलाव लाने की ज़रूरत है. मानवाधिकार समूहों की हालिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया है कि धार्मिक शिक्षण कंटेंट में परेशानी पहुचने वाले तत्व मौजूद है.

source: TradeArabia

एचआरडब्ल्यू के कार्यकारी निदेशक सारा लिआह व्हिट्सन ने कहा कि, “सरकार की असहिष्णु और भेदभावपूर्ण नीतियां, उग्रवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देती है. “सऊदी अरब को पाठ्य पुस्तकों और शिक्षकों जो धार्मिक नफरत को खत्म करने के लिए अपनी शिक्षा प्रणाली में सुधार करने की ज़रुरत है, बल्कि अपने शिया और विदेशी ईसाई आबादी के खिलाफ बड़े पैमाने पर भेदभाव को खत्म करने की भी ज़रुरत है.”

शिक्षा मंत्री अहमद अल-ईसा ने पिछले साल घोषणा की थी कि सरकार ने प्रणाली को पूरी तरह से सही करने के प्रयासों के तहत 2020 तक पाठ्यपुस्तकों की प्रिंटिंग रोक दी जाएगी. इसके बजाय, स्कूल में इंटरैक्टिव टेबलेट्स और डिजिटल पाठ्यक्रम बनाया जाएगा. जो रियल टाइम सर्विस देगा और जिसे तुरंत अपडेट किया जा सकेगा.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसका मतलब यह है कि शिक्षा पाठ्यक्रम जांच करने के लिए पूरी तरह से खुले हैं और अगर किताबों में किसी भी तरह का ‘अपमानजनिक’ या ‘उग्रवाद’ फ़ैलाने वाला कंटेंट मिलता है तो उसे तुरंत ही हटा दिया जाएगा.

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