भारत: आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब विदेशों में रोजगार पाने वाले भारतीयों के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है, जिसके परिणामस्वरूप गल्फ राज्य भारत के लोगों को नौकरियां प्रदान करने वाला एक बड़ा स्रोत बन गया हैं.

रियाद में भारत के राजदूत द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब में प्रवासी भारतीयों की संख्या मार्च में 3,039,193 थी, जो अक्टूबर में 3,253,901 तक पहुची, यह संख्या सात महीनों के अंदर 200,000 तक पहुच  गयी है. वह न केवल नीले-कॉलर वाले कर्मचारियों को शामिल करते हैं बल्कि बढ़ते हुए डॉक्टरों, इंजीनियरों, तेल प्रौद्योगिकीविदों, आईटी विशेषज्ञों और अन्य टेक्नोक्रेट, जो कि राज्य की अर्थव्यवस्था में तेजी से अवसर मिलने की  तलाश कर रहे हैं और प्रवासियों को आज़ाद वातावरण दिए जा रहे है.

द इकनोमिक टाइम्स के मुताबिक, प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों को देखा जाए तो भारत में प्रवासी को भेजी हुई रकम का उच्च अंक रहा है, जिसमें अकेले 2015 में लगभग 69 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. करीब 69 अरब डॉलर भारत आए, सऊदी अरब में 10.5 अरब डॉलर से अधिक की कमाई हुई थी, जोकि कुल भेजी गयी रकम का एक छमावा हिस्सा है.

हालांकि, 2016 में, भारत को भेजी गयी रकम 2015 की तुलना में 6 अरब डॉलर घटी थी, यह तेल की कीमतों में गिरावट और गल्फ शेत्रों में धीमें आर्थिक विकास की वजह से हुई थी.लेकिन पिछले साल 25 डॉलर प्रति बैरल की कम होने के बाद, तेल की कीमतें अब 60 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं, यह दिखता है कि गल्फ देशों के तेल कंपनियों के बीच सौहार्द के साथ भारत के लिए भेजी हुई रकम का प्राथमिक स्रोत रहेगा.

सऊदी अरब में प्रवासी भारतीयों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी ने विश्व बैंक की भविष्यवाणियों की पुष्टि की है कि देश के बीच में भेजी हुई रकम 2018 में 615 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगी. इसमें से, 460 बिलियन डॉलर विकासशील देशों द्वारा प्राप्त होंगे, जो 2016 की तुलना में  $30 की बढ़ोतरी होगी.

विश्व बैंक के मुताबिक 2016 में दुनिया भर में 575 अरब डॉलर रकम भेजी गयी. इसमें से 429 अरब डॉलर भारत जैसे विकासशील देशों ने कमायें है.

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