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इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के ईरान के साथ रिश्तें किसी से छुपे नहीं है. ईरान के खिलाफ सद्दाम की नाराजगी उनकी मौत तक रही. फांसी पर चढ़ाये जाने तक वे दुनिया को ईरान के विश्वासघाती होने को लेकर सचेत करते रहे.

इस बात का खुलासा, अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के इंस्पैक्टर जॉन निकसन ने किया है. उन्होंने बताया, जेल में सद्दाम के अंतिम के जीवन के अंतिम दिनों में दिनों में जब मैंने सद्दाम से ईरान के बारे में उनके विचारों के संबंध में पूछा तो एकदम से उनका लहजा बदल गया और वह ईरानियों के बारे में अपनी घृणा को छुपा नहीं सके.

निकसन ने बताया, जब भी बातचीत के दौरान ईरान का नाम आता था तो सद्दाम व्याकुल हो जाते थे. सद्दाम का कहना था कि ईरानी भरोसेमंद लोग नहीं हैं. वे सभी को झूठा समझते हैं. पहले एक बात कहते हैं, फिर ख़ुद ही उसके विपरीत व्यवहार करते हैं. ईरानियों का स्वभाव ही कुछ इस तरह का है.

सद्दाम का कहना था कि ईरान इस्लाम के नाम पर अरब जगत में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है. वे सोचते हैं कि अगर उन्हें अवसर मिलता तो बैतुल मुक़द्दस (यरूश्लम) की आज़ादी के अभियान का नेतृत्व करते. वे समझते हैं कि अरब जगत का नेतृत्व कर सकते हैं.

ध्यान रहे सद्दाम के शासन के दौरान 1988 में ईरान और इराक के बीच युद्ध हुआ था. इराक ने ईरान पर 20 अगस्त 1988 को हमला किया था.

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