सीरिया पर हुए अमेरिकी हमले के बाद दोनों देश आमने सामने आ गये है

अमरीका द्वारा सीरिया की एयरबेस पर हमले के फ़ौरन बाद रूस ने अटलांटिक सागर में तैनात अपने एक युद्धपोत को सीरिया के तरतूस बंदरगाह की ओर भेजने का फ़ैसला लिया है।

प्रप्त रिपोर्टों के अनुसार एक रूसी सैन्य अधिकारी ने कहा कि सीरिया लाजेस्टिक सैन्य अड्डे की ओर रवाना होने वाले कैलिबर प्रकृति के क्रूज़ मिज़ाइलों से लैस एडमिरल गैरिगोरोविच जहाज़ों की तैनाती का संबंध वहाँ की स्थिति के ऊपर निर्भर है। सैन्य अधिकारी ने कहा कि इन जहाज़ो की तैनाती की अवधि कम से कम एक महीने तक होगी।

रूसी नौसेना का बेड़ा, दक्षिणी रूस में स्थित नोवोरोसियिस्क बंदरगाह से प्रशांत सागर में तुर्की के जहाज़ों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद सीरिया की समुद्री सीमा की ओर रवाना होगा।

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उल्लेखनीय है कि रूस का यह नौसैनिक युद्धपोत मार्च में भी सीरिया के समुद्री सीमा में तैनात था। रूस के रक्षा मंत्रालय की घोषणा के अनुसार इस जहाज़ ने 2 मार्च को मेडिटिरेनियन सी में प्रवेश किया था जिसने 31 मार्च को नोवोरोसियिस्क बंदरगाह पर लंगर डाला था।

सीरिया के तटीय शहर तरतूस में रूस का एक नौसैनिक सैन्य अड्डा है, जहां उसने S-300 मिसाइल प्रणाली भी स्थापित कर रखी है। रूस ने घोषणा की है कि इस क़दम का उद्देश्य इस अड्डे की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना है।

दूसरी ओर मध्यपूर्व के मामलों के जानकारों का मानना है कि अमरीका द्वारा सीरिया के एयरबेस पर मीज़ाइलों के हमले के बाद मास्को और वाशिंग्टन के संबंधों में काफ़ी तानाव आया है और रूस द्वारा सीरिया भेजे जा रहे युद्धपोतों के बाद क्षेत्र की स्थिति बहुत तनावपूर्ण हो सकती है। इस बीच रूस के युद्धपोतों के सीरिया रवाना होने की ख़बर के बाद ट्रम्प प्रशासन में भी बेचैनी पैदा हो गई है।

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