Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

शिविरों में कुपोषण से मर रहे हैं रोहिंग्या बच्चे, दुनिया म्यांमार के जुल्म पर खामोश

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25 अगस्त के बाद राखिने में शुरू हुए म्यांमार सेना और बौद्ध चरमपंथियों के हिंसा के नंगे नाच ने 7 लाख के करीब रोहिंग्या मुस्लिमों को अपना कुछ छोड़ के जान बचाने के लिए सीमा पार बांग्लादेश जाने को मजबूर कर दिया. इन रोहिंग्या मुस्लिमों में सबसे ज्यादा तादाद बच्चें और महिलाओं की है.

ऐसे में अब इन शिविरों में रह रहे रोहिंग्या बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे है. अब तक दर्जनों बच्चें अकाल मौत में मारे जा रहे है. कैंप की मेडिकल युनिट का कहना है कि इन बच्चों की हालत गंभीर है. मेंडिकल टीमें खाने के पैकेट इन बच्चों के बीच बांट रही हैं लेकिन यह काफ़ी नहीं है.

युनिसेफ़ का अनुमान है कि अलग अलग कैंपों में 25 हज़ार से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं जो अब उनकी जान ले रहा है. युनिसेफ़ के अधिकारी एडवर्ड बीगबेडर का कहना है कि इन बच्चों की मौत एसे कारणों से हो रही है जिसे रोका जा सकता है. इन बच्चों को तत्काल सहायता की ज़रूरत है.

हाल ही में यूनिसेफ ने रोहिंग्या रिफुजी चिल्ड्रेन फेस एक पेरिलियस फ्यूचर नाम की रिपोर्ट पेश की थी. जिसमे बताया गया था कि  एक अनुमान के मुताबिक पांच साल की उम्र तक के पांच में से एक बच्चा गम्भीर कुपोषण का शिकार है और करीब 14500 कुपोषण की बेहद गम्भीर स्थिति में हैं.

युनिसेफ के प्रवक्ता क्रिस्टोफ बाॅलीएरिक ने बताया कि बांग्लादेश के  कॅाक्स बाज़ार में इन शरणार्थियों की दशा और रहने का ठिकाना नहीं है. उन्होंने कहा, शरणार्थी रोहिंग्या बच्चों का एक चौथाई भाग, कुपोषण का शिकार है और यह बहुत बड़ी संख्या है, यदि उन के लिए खान -पान की उचित व्यवस्था नहीं की गयी तो वह सब मर सकते हैं.

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