कुआलालम्पुर: गुरुवार को इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्यचार को लेकर एक आपातकालीन बैठक बुलाई. जिसमे म्यांमार सरकार को चेतावनी देते हुए कहा गया कि म्यांमार सरकार रोहिंग्या संकट से निपटने के लिए तत्काल निर्णायक कदम” उठाए.

सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की ओआईसी परिषद ने इस बैठक में उत्तरी अराकान में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ हुई हिंसा, जिसमे सेकड़ों लोगों की जान गई और हजारों को विस्थापित होना पड़ा पर अपनी चिंता व्यक्त की. म्यांमार सरकार से कहा गया कि यह सुनिश्चित करे  कि सुरक्षा बलों को कानून के अनुसार हिंसा रोकने के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके.

मलेशिया के पूर्व विदेश मंत्री सैयद हामिद ने कहा कि म्यांमार ने ओआईसी को रोहिंग्या को सहायता प्रदान करने के लिए अनुमति देने के लिए मना कर दिया था. उसने कहा यह अनुमति केवल अलग-अलग देशों को होगी. बैठक में मलेशिया के प्रधानमंत्री श्री नजीब रजाक ने संबोधित करते हुए कहा कि म्यांमार से पूछा जाना चाहिए कि “रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा और नफरत रोकने के लिए उसने क्या किया”

सैयद हामिद ने कहा, “इस बैठक से रोहिंग्या मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला हैं जब वहाँ मानवता के विरुद्ध जातीय सफाई के अपराधों के आरोप हैं” उन्होंने कहा, हम म्यांमार सभी सैन्य अभियानों को रुकवाना चाहते हैं, जिससे समुदाय के खिलाफ उत्साह से हिंसा और नफरत का अभियान चलाया जा रहा है”

उन्होंने कहा, “कंबोडिया और रवांडा की तरह हम एक और नरसंहार नहीं चाहते हैं, जो वहां हुआ उसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर्याप्त रूप में नाकाम रहा.

सैयद हामिद ने कहा कि ओआईसी सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को Maungdaw टाउनशिप जहाँ अक्टूबर से शुरू हुए म्यांमार सरकार के सैन्य अभियान जिसमे मुस्लिमों को पुलिस चौकियों पर हमला करने के आरोप में मारा गया, की निष्पक्ष जांच करने की जरूरत हैं.


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