Mohammed Shohayet’s body washed up on a river bank. Credit: CNN

म्यांमार के रखाईन प्रांत में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के हो रहे नरसंहार पर दुनिया भर ने आंखे बंद कर रखी हैं. मानवाधिकारों का झंडा बुलंद करने वाले विशेषकर पश्चिमी देशो को म्यांमार सरकार का जुल्म नजर नहीं आ रहा हैं. बल्कि वे उसकी तारीफ़ कर रहे हैं.

म्यांमार की यात्रा पर पहुंचे ब्रिटिश विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने म्यांमार सरकार को मानवाधिकारों के मुद्दे को लेकर कड़ा संदेश देने के बजाय उसके लोकतंत्र की तारीफों के पूल बांधे. जिसमें रोहिंग्या मुस्लिमों का नरसंहार किया जा रहा हैं. जिसके कारण वे पलायन को मजबूर हैं.

जॉनसन ने अपनी यात्रा के दौरान, रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों का विरोध किए जाने और इन अत्याचारों को बंद करने के लिए किसी तरह का दबाव डालने के बजाए, इस देश में लोकतंत्र की स्थापना की प्रशंसा की है.

जॉनसन ने म्यांमार के लोकतंत्र का समर्थन ऐसे वक्त किया हैं जब सयुंक्त राष्ट्र संघ की और से अपने प्रतिनिधि के रूप में 12 दिन की जांच के लिए म्यांमार भेजी गई यांग ली ने अपनी जांच के बाद कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर बौद्ध समुदाय के आतंकियों और सुरक्षा बलों के हाथों बड़े पैमाने पर अत्याचार हो रहा हैं.

याद रहे कि 9 अक्तूबर 2016 को म्यांमार के राख़ीन प्रांत के नगर माउंगदाओ में सशस्त्र लोगों ने हमले किये थे जिसमें कम से कम 100 रोहिंग्या मुसलमान मारे गए थे इन हिंसक हमलों के कारण साठ हज़ार से अधिक रोहिंग्या मुसलमान, म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश भाग गए थे.

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