ढाका: बांग्लादेश में शरण लिए लाखों रोहिंग्या मुसलमान सुरक्षा के अभाव में म्यांमार जाने से मना कर रहे है. शुक्रवार को रोहिंग्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश सरकार के इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन भी किया.

शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान रोहिंग्या मुसलमान नागरिकता और सुरक्षा की गारंटी की मांग वाले नारे लगा रहे थे और हाथों में बैनर लिए हुए थे. यह प्रदर्शन ऐसी स्थिति में हुए जब संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक यांगी ली  दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश के शिविरों की यात्रा करने वाली है.

ध्यान रहे म्यांमार और बांग्लादेश के बीच हुई सहमति के बाद अब दस लाख के करीब रोहिंग्याओं की घर वापसी होनी है. फिलहाल 30 हजार लोगों के लिए म्यांमार सरकार ने अस्थायी कैंप तैयार कर लिए है. ये अस्थायी आवास म्यांमार और बांग्लादेश के अधिकारियों के बीच हुए समझौते की निर्धारित समय सीमा के भीतर तैयार किये जा रहे है.

आप को बता दें कि बांग्लादेश की थलसेना ने पिछले साल म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों के नए जत्थे के देश में दाख़िल होने के बाद इन शरणार्थियों का बायोमेट्रिक पंजीकरण शुरू किया था. इस संबंध में बांग्लादेशी थलसेना में ब्रिगेडियर जनरल और रोहिंग्या पंजीकरण परियोजना के प्रमुख सईदुर रहमान ने कहा था, ‘अब तक हमने 1,004,742 रोहिंग्या शरणार्थियों का पंजीकरण किया है. उन्हें बायोमेट्रिक पंजीकरण कार्ड दिए गए हैं.’

उन्होंने कहा था कि अभी हज़ारों रोहिंग्या शरणार्थियों का पंजीकरण बाकी है. रहमान ने कहा कि ताज़ा आंकड़े संयुक्त राष्ट्र की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों से ज़्यादा हैं. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दक्षिण-पूर्व बांग्लादेश में म्यांमार सीमा के पास 9,62,000 रोहिंग्या रह रहे हैं.

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