पोप फ़्रांसिस ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार और उन पर हो रहे अत्याचारों की आलोचना की हैं. उन्होंने कहा कि उन पर इसलिए जुल्म हो रहा हैं कि वे इस्लाम धर्म के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्मो ज्यादती इसलिए की जा रही हैं कि वे अपनी संस्कृति और धार्मिक आस्था के मुताबिक़ जीना चाहते हैं. पोप ने कहा कि रोहिंग्या अल्पसंख्यक एक जगह से दूसरी जगह जाने पर इसलिए मजबूर हैं कि कोई भी उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहता है.

पोप ने आगे कहा कि वे अच्छे लोग हैं, शांति प्रिय हैं. वे इसाई नहीं हैं. लेकिन वे भले लोग हैं. वे हमारे भाई और बहने हैं. पोप फ़्रांसिस ने पीड़ित रोहिंग्या मुसलमानों के लिए दुआ करने की भी अपील की है.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की और से जारी रिपोर्ट में पता चला हैं कि Area clearance operations’ के नाम पर म्यांमार में सैकड़ों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों की हत्याएं हुई हैं. ये रिपोर्ट अपनी जान बचाकर बांगलादेश पहुंचे  204 रोहिंग्या शरणार्थियों के बयानों के आधार पर हैं.

इस रिपोर्ट में बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र की और से 101 महिलाओं के भी बयान दर्ज किये गए जिनमे आधे से अधिक महिलाओं ने बताया कि उनके साथ बलात्कार किया गया. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को कई महिलाओं ने बताया कि कैसे उनके सामने उनके नवजात शिशु सहित उनके युवा बच्चों को मारा गया. उन्होंने बताया कि उनके बच्चों को काट दिया गया, कुचल दिया गया.

सुरक्षा बलों ने पूरे गांव में आग लगाईं, उसके बाद बड़े पैमाने पर हत्याए की गई, बलात्कार किये गये और उनके खाद्यान सामग्री को भी जला दिया गया. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि ऐसी भी खबर हैं कि 6 साल के तीन बच्चों की चाकू से काटकर उनकी बलि भी दी गई.

इसी के साथ संयुक्त राष्ट्र की और से कहा गया कि एक आठ महीने के बच्चें की भी निर्मम तरीके से हत्या की गई और उसकी मां के साथ पांच सुरक्षा अधिकारियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया.


शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें