25 अगस्त से राखिने प्रान्त में शुरू हुए म्यांमार सेना के कथित अभियान के बाद लाखों की तादाद में रोहिंग्या मुस्लिमों ने विभिन्न देशों में पलायन किया है. हालांकि बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पहुंचे है.

सयुंक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ सैन्य अभियान को नस्लीय सफाए का नाम दिया है. साथ ही सैन्य अभियान को खत्म कर रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस लेने की मांग की है. जिसे म्यांमार ने स्वीकार कर लिया है. हालांकि इस के लिए उसने के शर्त रखी है.

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म्यांमार के समाज कल्याण, राहत व पुनर्वास विभाग के मंत्री यू विन म्यात अए ने इस बारें में कहा कि म्यांमार और बांग्लादेश द्वारा 1993 में बनीं सहमति के सिद्धांतों के तहत रोहिंग्या मुस्लिमों का वेरिफिकेशन होगा. ये वेरिफिकेशन तौंगप्यो लातवे और नगुआ गांव में किया जाएगा.

म्यांमार सरकार ने कहा कि जो लोग सड़क मार्ग से लौटना चाहते हैं वह तौंगप्यो लातवे और जो समुद्र मार्ग से लौटना चाहते हैं वह नगुआ गांव में अपना सत्यापन कराएंगे. फिर सत्यापित शरणार्थियों को दार्गयिजार गांव में बसाया जाएगा.

हालांकि इस सबंध में पहले स्टेट काउंसलर के कार्यालय के मंत्री यू क्यू टिंट अधिकारियों के साथ वार्ता के लिए बांग्लादेश जाएंगे.

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