25 अगस्त के बाद रोहिंग्या विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान के नाम पर म्यांमार सेना ने जो हैवानियत पेश की है. उससे इंसानियत भी शर्मसार हो रही है.

बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार में रह रहे पीड़ितों के बयानों के आधार पर सेव द चिल्ड्रेन संस्था ने जर्मन अख़बार ‘द वाल्ट’ को बताया कि म्यांमार में बच्चों और औरतों के साथ जो हिंसक व्यवहार हुए हैं उसकी कल्पना करना भी मुमकिन नहीं है.

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संगठन की प्रमुख हेल थॉर्निंग श्मिद ने बताया कि म्यांमार सेना का हैवानियत का दंश रोहिंग्या रोहिंग्या औरतों और बच्चियों ने झेला है. लगभग सभी रोहिंग्या बच्चे उन ख़तरनाक घटनाओं के बारे में बता रहे हैं जो उन्होंने अपनी आंखों से देखा है.

एक जवान महिला ने बताया कि उसने अपनी आंखों से देखा कि किस तरह एक म्यांमारी सैनिक ने एक गर्भवती महिला पर पेट्रोल छिड़क उसे ज़िन्दा जला दिया.  इसके अलावा एक और सैनिक ने एक बच्चे को उसकी मांग की गोद से छीन कर जलती आग में डाल दिया.

ध्यान रहे रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार को सयुंक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या को जातीय सफाया करार दिया है. साथ ही युद्ध अपराध के तहत अंतराष्ट्रीय न्यायालय में दोषियों के खिलाफ मामला चलाने पर जोर दिया.

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