विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 6 अप्रैल, 2020 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशों को धर्म या किसी अन्य मानदंड के संदर्भ में कोरोनावायरस रोग (COVID-19) के मामलों की प्रोफाइल नहीं देनी चाहिए।

6 अप्रैल को भारत से जुड़े विशेष सवाल पर डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन कार्यक्रम निदेशक माइक रयान ने कहा, “यह मदद नहीं करता है।” COVID-19 का होना किसी की गलती नहीं है। हर मामला एक पीड़ित का है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम नस्लीय, धार्मिक और जातीय आधारों के आधार पर मामलों को प्रोफाइल नहीं करते हैं।”

रयान ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एचसीडब्ल्यू) पर हमले कहीं भी अपमानजनक थे और उनकी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाया जाना चाहिए। यह टिप्पणी इंदौर में एक घटना के संदर्भ में आई। जहां मुस्लिम बहुल इलाके में नियमित निगरानी के दौरान एचसीडब्ल्यू पर कथित तौर पर हम’ला किया गया था।

बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, जो नियमित रूप से मीडिया को जानकारी दे रहे थे, ने अपने बयानों में तबलीगी जमात का जिक्र किया था। लव अग्रवाल ने कहा कि नए मामलों की पहचान करने के लिए उनकी जांच प्रगति पर है। दक्षिण पश्चिम दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में भाग लेने वाले काफी लोग देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच चुके हैं, जिन्हें ढूंढकर एकांतवास में करने का काम किया जा रहा है।

वहीं  गृह मंत्रालय ने कहा है कि दिल्ली में तबलीगी जमात मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में शामिल करीब दो हजार लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 1,804 को एकांतवास में रखा गया है, जबकि 334 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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