रूस की राजधानी मॉस्को में क़ुरआने मजीद का दूसरा इंटरनेशनल फ़ेस्टीवल आयोजित किया गया। ये फेस्टिवल मॉस्को की जामा मस्जिद में किया गया। इस फ़ेस्टिवल का मकसद लोगों को इस्लाम के बारें में जानकारी प्रदान करना हैं।

 

इस फेस्टिवल के बारे में मॉस्को की जामा मस्जिद के इमाम ईलदार इलियातेदेनेफ़ ने बताया कि इस समय इस्लाम और मुसलमानों के बारे में अनेक ग़लत विचार पाए जाते हैं और बहुत से लोग, इस्लाम और क़ुरआन के संदेश को सही ढंग से नहीं समझ पाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें आशा है कि इस फ़ेस्टीवल जैसे कार्यक्रम इस्लाम के बारे में ग़लत विचारों व धारणाओं को समाप्त करेंगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय जब संसार में रक्तपात और जनसंहार का बाज़ार गर्म है, यह मामला बहुत अहम हो जाता है क्योंकि इन जनसंहारों को इस्लाम से जोड़ा जा रहा है और यह बात मुसलमानों के लिए बहुत तकलीफ़देह है।

इस फ़ेस्टीवल में भाग लेने वालों को इस्लाम की सबसे पवित्र पुस्तक क़ुरआने मजीद के बारे में जानकारी हासिल करने, उसकी तिलावत करने, रूस में इस्लाम के आगमन के इतिहास के बारे में जानने और मॉस्को की जामा मस्जिद के दर्शन का बेजोड़ अवसर मिला है।

इस फेस्टिवल में डेढ़ सौ साल पुराने कुरान ए पाक को भी पेश किया गया। फ़ेस्टीवल में भाग लेने वाली हफ़ीज़ा कचावा ने फ़ेस्टीवल के एक क़ुरआन के बारे में बताया कि यह एक बड़ा पुराना क़ुरआन है, इसे लिखे हुए डेढ़ सौ साल से अधिक का समय बीत चुका है और हम इसे रूसी फ़ेडरेशन के एक गणराज्य क़रेचाए के लोगों के ऐतिहासिक व धार्मिक प्रतीक के रूप में फ़ेडरेशन में लाए हैं।

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