कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने गुरुवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) से देश की वापसी की संभावना से इनकार कर दिया.

कतर के अश्शरक़ समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि उनका देश दोहा स्थित इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ इस्लामिक स्कॉलर के प्रमुख यूसुफ अल-क़ारदावी का प्रत्यर्पण नहीं करेगा, जो के मिस्र के अधिकारी चाहते है.

उन्होंने कहा कि “वह एक ‘आतंकवादी’ नहीं है बल्कि उन्होंने एक राजनीतिक असंतुष्ट दृष्टिकोण को पेश किया है. अल थानी ने कहा, “हमारे पास कई ऐसे व्यक्ति हैं, जो मिस्र से न केवल कई देशों से हैं.”

अल थानी ने कहा, “हम उन्हें किसी भी राजनीतिक गतिविधियों को पूरा करने की अनुमति नहीं देते हैं या कतर को अपने देशों पर हमला करने या हमला करने के लिए प्लेटफार्म के रूप में इस्तेमाल नहीं करने देते हैं.”

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कतर ने मिस्र में करीब 20 अरब डॉलर के निवेश को वापस नहीं लिया है क्योंकि ये निवेश मिस्र के लोगों की मदद के लिए है. जो रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान करता हैं.

उन्होंने कहा, कतर का मानना ​​है कि यदि मिस्र मजबूत है तो उसे अरब दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. अल थानी ने जीसीसी को “इस क्षेत्र में स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्रोत” के रूप में वर्णित किया.

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