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लंदन: भारत में अल्पसंख्यकों और दलितों पर हिंदुत्व की और से हमलों के विरोध में बड़े पैमाने पर भारतीय उच्च आयोग के बाहर गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शन किया. कड़ी ठण्ड में कई कार्यकर्ता भारत हाउस के बाहर इकट्ठे हुए और हिंदुत्व विरोधी नारे लगाते रहे.

गौरी लंकेश, अख़लाक़, जुनेद, रोहित वेमुला आदि की हत्याओं के विरोध में ये प्रदर्शन किया गया. इस दौरान प्रदर्शनकारियो ने न्यायमूर्ति लोया की मौत का भी मुद्दा उठाया. प्रदर्शनकारी  “न्यायमूर्ति लोया को किसने मार डाला ?” जैसे नारों की तख्तियां लेकर खड़े रहे.

यह विरोध अदक्षिण एशिया एकता समूह (एसएएसजी) द्वारा आयोजित किया गया. अपने भाषण में एसएएसजी के प्रवक्ता, लेखक और कार्यकर्ता अमृत विल्सन ने कहा, “हम यहां पिछले शनिवार को बारिश में एक हजार से ज्यादा लोग खड़े हुए थे. हमारे पास प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति के लिए एक पत्र था.

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उन्होंने कहा, लेकिन हमें भारतीय उच्चायोग ने बताया कि वे हमारी पत्र नहीं लेंगे. उनके पास इस पत्र को अस्वीकार करने के लिए भारत सरकार से निर्देश आए थे. उन्हें हमारा पत्र नहीं लिया. लेकिन हम दुनिया को बता रहे हैं और दुनिया देख रही है कि भारत में क्या हो रहा है.”

SOAS इंडिया सोसाइटी के रतुजा देशमुख ने कहा, “गाय के नाम पर मुसलमानों की लिंचिंग से, एक फिल्म के लिए स्कूल की बस पर हमले और न्यायमूर्ति लॉया की रहस्यमय मौत, निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त कारणों से भी अधिक है भारतीय राज्य एक फासीवादी शासन में बदल रहा है. यह हमारा कर्तव्य है कि जिम्मेदार नागरिक के रूप में इस फासीवाद का विरोध करे.

दक्षिण एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप की ओर से निर्मला राजसिंघम ने कहा, “हम भारतीयों के साथ खड़े हैं जो हिंदू प्रतापी मोदी शासन की कोरियोग्राफी की भयभीत हिंसा के खिलाफ दुखी और क्रोध में हैं और इसको खुले तौर पर फासीवादी मूल संगठन आरएसएस यहां ब्रिटेन में भी फैला रहे हैं. हम उन्हें सामना करना जारी रखेंगे.

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