ट्रम्प प्रशासन के अंत के साथ, फिलिस्तीनियों के खिलाफ युद्ध अपराधों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) द्वारा फिर जांच शुरू करने की संभावनाओं ने इसराइल की चिंता बढ़ा दी है।

KAN चैनल ने रविवार को बताया कि गाजा पट्टी पर 2014 के युद्ध के दौरान इजराइल द्वारा किए गए कथित युद्ध अपराधों की जांच करने के लिए ICC को शर्मिंदगी महसूस हो सकती है।

दरअसल, ट्रम्प प्रशासन के साथ टकराव से बचने के लिए आईसीसी ने दिसंबर 2019 से जांच को खोलने का निर्णय निलंबित कर दिया गया था। साथ ही जून 2020 में अफगानिस्तान में होने वाले संभावित अमेरिकी युद्ध अपराधों की जांच पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

चैनल ने कहा, “इस तरह की जांच में कई उच्च-स्तरीय इजरायल के राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के लिए व्यापक निहितार्थ होंगे, जिन्हें ट्रिब्यूनल के सदस्यों द्वारा जारी किए गए अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट के अधीन किया जा सकता है।”

दिसंबर 2019 में, आईसीसी के मुख्य अभियोजक फतौ बेन्सौडा ने घोषणा की कि अदालत ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल द्वारा किए गए युद्ध अपराधों के संदेह की जांच करने के लिए पर्याप्त सबूत पाए।

2014 में 51 दिनों के इजरायल के हमले में 2,322 फिलिस्तीनी मारे गए थे। वहीं 11,000 लोग घायल हुए।