संयुक्त राष्ट्रसंघ में सीरिया के राजदूत ने मध्यपूर्व और फिलिस्तीन के मामलों की समीक्षा के लिए सुरक्षा परिषद की आयोजित  बैठक में कहा कि दमिश्क अपना भविष्य निर्धारित करने हेतु फिलिस्तीनी जनता के अधिकार, एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के गठन और इसी प्रकार फिलिस्तीनी शरणार्थियों की स्वदेश वापसी के अधिकार पर बल देता है.

जाफरी ने सीरिया के गोलान की पहाड़ियों के अतिग्रहण की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जायोनी शासन द्वारा सीरिया के गोलान की पहाड़ियों के अतिग्रहण के विषय की अनदेखी ऐसी स्थिति में की जा रही है जब गोलान की पहाड़ियों का विषय मध्यपूर्व के बुनियादी मामलों में से है.

उन्होंने कहा कि इस्राईल के अतिक्रमण के मुकाबले में सुरक्षा परिषद का कमजोर दृष्टिकोण इस बात का कारण बना है कि जायोनी शासन गोलान के अतिग्रहित क्षेत्र में आतंकवादी गुटों के समर्थन में किसी प्रकार का भय न करे.

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जाफरी ने इजराइल को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस शासन का आधार ही अतिग्रहण और राष्ट्रों को बेघर करना है वह न तो डेमोक्रेसी का दावा कर सकता है और न ही सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रति चिंता जता सकता है.

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