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हेब्रोन की इब्राहीम की मस्जिद हत्याकांड को 24 साल पुरे हो चुके है. लेकिन आज भी फिलिस्तीन का मुसलमान न्याय की उम्मीद में है. 24 साल पहले इज़राइली आबादकार ने रमजान में फजर के वक्त इब्राहिम मस्जिद में आग लगा दी थी. जिसमे नमाज अदा करने पहुंचे 29 मुसलमान शहीद हो गए थे. इसके अलावा 150 अन्य घायल हुए थे.

इस दौरान इज़राइलियो ने हैवानियत की कोई कसर नहीं छोड़ी. जलते मुसलमानों को बाहर आने से रोकने के लिए मस्जिद के दरवाजे बंद कर दिए. साथ ही इजरायली सैनिकों ने मस्जिद को घेर लिया और बाहर से आने वाली मदद को भी रोक दिया था.

नमाजियों को बचाने के लिए फिलिस्तीनियों की इज़राइलियो के साथ झडप भी हुई. जिसमे करीब 10 और फिलिस्तीनी मुसलमान शहीद हुए. जिसकी वजह से शहीद होने वालों की तादाद 60 तक पहुचं गई थी. इस नरसंहार के तुरंत बाद, इसराइल ने हिब्रोन के पुराने शहर को छह महीने तक  बंद करने का फैसला किया, जहां इब्राहिमी मस्जिद स्थित है.

इसके बाद इजराइल ने मुस्लिमों और यहूदियों के बीच मस्जिद को विभाजित करने के लिए, यहाँ बसने वालों को दंड देने और नरसंहार की जांच के लिए एकसमिति का गठन किया गया. साथ ही शहर की कई गलियों को बंद कर दिया गया. जिनमे सबसे प्रसिद्ध शूहडा स्ट्रीट भी शामिल है. जो आज तक फिलिस्तीनियों के लिए बंद रहती है.

साथ ही फिलीस्तीनियों के आंदोलन को प्रतिबंधित करने के लिए सैनिक चौकियों की स्थापना भी की गई, जबकि इजरायली स्वतंत्र रूप से यहाँ बसते चले गए.

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