हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान सऊदी अरब में अपनी सेनाओं की तैनाती करने जा रहा है. इस बारें में पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान की सउदी अरब में सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है.

दरअसल यमन के साथ चल रहे संघर्ष के बाद सउदी अरब की दक्षिणी सीमा की सुरक्षा में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती संबंधी खबरें मीडिया में आई थीं. पाक सैनिकों को सऊदी सीमा के बाहर इस्तेमाल नहीं किये जाने की भी बात की गई थी. कौमी असेम्बली में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद शफकत महमूद के सवाल के जवाब में पाक रक्षा मंत्री ने इस तरह की सभी ख़बरों को खारिज कर दिया.

आसिफ ने कहा, ‘सउदी अरब-यमन संघर्ष के मद्देनजर किसी सैन्यकर्मी को सउदी अरब नहीं भेजा गया है.’ उन्होंने कहा, ‘सउदी अरब-यमन संघर्ष में नहीं उलझना हमारी नीति है. यदि कोई फैसला लिया जायेगा, वह संसद से होकर जायेगा.’ संसद ने 2015 में नीतिगत चर्चा के दौरान सरकार से कहा था कि वह सउदी अरब-यमन संघर्ष में ना उलझे.

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ध्यान रहे 2 साल पहले सऊदी अरब के यमन के ख़िलाफ़ हवाई हमले में पाकिस्तान को शामिल करने के निवेदन को पाकिस्तानी संसद नकार चुका हैं. पाकिस्तान ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इस युद्ध में वह हिस्सा नहीं लेगा. इस तरह के युद्ध का उद्देश्य मुसलमानों को फुट डालकर आपस में लड़ाने के लिए हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज ने कहा था कि यमन युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य भागीदारी होती हैं तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ उनकी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं. वास्ताव में यह मतों की लड़ाई है जिसका उद्देश्य मुसलमानों के बीच फूट डालकर विभाजित करना हैं. उन्होंने कहा कि यमन युद्ध में भाग लेने का अर्थ यह है कि हम स्वयं पाकिस्तानी जनता के बीच युद्ध की चिंगारी भड़काएं इसलिए किसी भी तरह यह उचित नहीं है कि पाकिस्तान यमन युद्ध में भाग ले.

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