Monday, October 18, 2021

 

 

 

जुकरबर्ग को इमरान खान ने लिखा पत्र – FB पर इस्लामोफोबिक कंटेंट पर लगे रोक

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखा है। जिसमे उन्होने जुकरबर्ग से फेसबुक पर इस्लाम के प्रति नफरत फैलाने वाले कंटेट को बैन करने की मांग की।

अपने पत्र में इमरान खान ने कहा कि जिस तरह फेसबुक ने हॉलोकास्ट पर सवाल और आलोचना करने पर बैन लगाया, उसी तरह इस्लामोफोबिया से जुड़े कंटेंट पर भी रोक लगाई जाए। उन्होंने यहूदियों के खिलाफ हिटलर के हॉलोकास्ट का जिक्र करते हुए इससे जुड़े कंटेंट पर फेसबुक के प्रतिबंध की सराहना की है।

पत्र में इमरान ने लिखा है, ‘मैं आपका ध्यान दुनिया में बढ़ रहे इस्लामोफोबिया के मामलों की तरफ ले जाना चाहता हूं। सोशल मीडिया और खासकर फेसबुक के जरिए पूरी दुनिया में इस्लाम के प्रति नफरत बढ़ रही है।’ उन्होने कहा, फेसबुक सोशल मीडिया पर मुसलमानों के खिलाफ बढ़ रही नफरत की भाषा पर रोक लगाए।

इससे पहले उन्होने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पर इस्लाम पर हमला करने और इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

इमरान खान ने ट्वीट कर कहा, ‘एक नेता की पहचान होती है कि वह इंसानों को एकजुट करता है, जैसा कि मंडेला ने लोगों को विभाजित करने की बजाय उन्हें एक करने पर जोर दिया। लेकिन एक आज का समय है, जब राष्ट्रपति मैक्रों देश से रेसिज्म, ध्रुवीकरण हटाने की बजाय अतिवादियों (Terrorist) को हीलिंग टच और अस्वीकृत स्थान देने में लगे हैं, जो निश्चित रूप से उनकी कट्टरवादी सोच को दिखाता है।’

इमरान ने अगले ट्वीट में कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति मैक्रों हिंसा करने वाले आतंकवादियों के बजाय इस्लाम पर हमला करके इस्लामोफोबिया को प्रोत्साहित कर रहे है। अफसोस की बात है कि राष्ट्रपति मैक्रो ने इस्लाम और इस्लाम के रहनुमा पैगंबर साहब को निशाना बनाने वाले कार्टून के प्रदर्शन को बढ़ावा दिया हैं और जानबूझकर मुसलमानों को भड़कने पर मजबूर कर रहे हैं।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘फ्रांस के राष्ट्रपति को इस्लाम की कोई समझ नहीं है, फिर भी उन्होंने इस पर हमला करके यूरोप और दुनिया भर में लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया और उन्हें चोट पहुंचाई।’ इमरान ने कहा, ‘आखिरी चीज जिसे दुनिया चाहती है या जरूरत है, वह है कि दुनिया को ध्रुवीकरण और अज्ञानता की वजह से इस्लामोफोबिया पर सार्वजनिक बयान से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उग्रवादियों के मन में और भी नफरत पैदा हो जाएगी।’

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