पाकिस्तान की सीनेट ने बहुप्रतिक्षित हिंदू मैरिज बिल को पारित कर दिया है. कानून मंत्री जाहिद हमीद ने शनिवार को यह बिल सीनेट के समक्ष रखा, जिस पर किसी ने विरोध दर्ज नहीं कराया और यह बिल पास हो गया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये बाकायदा कानून बन जाएगा. इसके साथ ही देश के हिंदुओं को अपना पर्सनल लॉ मिलेगा. यह बिल नेशनल एसेंबली द्वारा 26 सिंतबर 2015 को ही पास किया जा चुका है.

द नेशन अखबार की खबर के मुताबिक इस विधेयक के जरिए हिंदुओं की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई हैं. इस बिल को हिंदू कम्युनिटीज पर्सनल लॉ नाम दिया गया हैं. बिल में पाक में रहने वाले हिंदुओं को मान्यता दी गई है, क्योंकि इसमें उनकी शादी, उसके रजिस्ट्रेशन और उम्र की बात कही गई है. बिल के मुताबिक, हिंदू लड़कियों को शादी का अब बाकायदा प्रूफ मिल सकेगा. इस कानून का उल्लंघन करने पर छह महीने की जेल और 5,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.

इस कानून के लागू होने के बाद हिंदू समुदाय के सदस्य शादी को पंजीकृत कराने के अलावा शादी टूटने के मामलों में अदालत में अपील कर सकेंगे. इसके मुताबिक मुसलमानों कि निकाहनामा की तरह ही हिंदुओं को भी अपने शादी के प्रमाण का दस्तावेज मिलेगा, जिसे ‘शादीपरात’ कहा जाएगा.

हिंदू मैरिज बिल पाक के हिंदुओं के लिए पहला पर्सनल लॉ होगा. ये पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रोविन्स में लागू होगा. गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी करीब 20 लाख है. पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की प्रमुख जोहरा युसूफ ने बताया कि विवाह का सबूत हिंदू महिलाओं को अधिक सुरक्षा मुहैया करेगा.


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