Sartaj-Azizपाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद के लिए यमन युद्ध में हिस्सा लेने वाले प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में यमन युद्ध में हिस्सा लेने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह के युद्ध का उद्देश्य मुसलमानों को फुट डालकर आपस में लड़ाना हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज ने कहा कि यमन युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य भागीदारी होती हैं तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ उनकी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी सेना यमन युद्ध में भाग लेती तो उसका सीधा अर्थ यह था कि उनके ही देश में दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले शिया मुसलमानों से सीधा टकराव.

सरताज अज़ीज़ ने आगे कहा कि वास्ताव में यह मतों की लड़ाई है जिसका उद्देश्य मुसलमानों के बीच फूट डालकर विभाजित करना हैं. उन्होंने कहा कि यमन युद्ध में भाग लेने का अर्थ यह है कि हम स्वयं पाकिस्तानी जनता के बीच युद्ध की चिंगारी भड़काएं इसलिए किसी भी तरह यह उचित नहीं है कि पाकिस्तान यमन युद्ध में भाग ले.

सरताज अज़ीज़ ने कहा कि पाकिस्तान ने 11 सितंबर की घटना के बाद ग़लत नीति अपनाई और अफ़्ग़ानिस्तान युद्ध में कूद पड़ा जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान को आज वर्षों से आतंकवाद का सामना कर रहा है. ऐसे में स्पष्ट हैं कि अब भविष्य में भी पाकिस्तान यमन युद्ध में भाग लेने का कोई इरादा नहीं हैं.


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