पाकिस्तान में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ को कानूनी मान्यता मिल गई हैं. सर्वोच्च शरियत अदालत ने इसे इस्लामिक शरीअत के तहत जायज करार दिया हैं.

शरिया अदालत ने कहा, ‘अगर शुक्राणु पिता से लिया गया हो और अंडाणु मां से लिया गया हो है और फिर टेस्ट ट्यूब में मेडिकल प्रक्रिया के जरिए इसका प्रजनन कराया जाता है तथा मां के गर्भ में भ्रुण को प्रतिस्थापित किया जाता है तो यह पूरी प्रक्रिया वैध है.’

आदेश में कहा गया, ‘इस प्रक्रिया को अवैध अथवा पवित्र कुरान और सुन्नत के खिलाफ नहीं कहा जा सकता.’ ‘इसकी वजह यह है कि शुक्राणु और अंडाणु असली पिता और माता का है. अगर किसी दंपत्ति को ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया सुझाई जाती है तो ऐसी स्थिति में कानूनी तौर पर कोई कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है. ऐसी स्थिति में बच्चा पूरी तरह कानूनी और वैधानिक होगा.’

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इसी के साथ अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी दूसरी स्थिति में टेस्ट ट्यूब बेबी प्रणाली अपनाना गैरइस्लामी माना जाएगा. चिकित्सक मजहर अहमद का कहना है कि पाकिस्तान में बांझपन का स्तर 10 फीसदी है लेकिन ऐसे 90 फीसदी मामलों में उपचार हो जाता है और सिर्फ 10 फीसदी मामलों इस तरह की प्रणाली की जरूरत पड़ती है.

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