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इस्लामाबाद | नया साल, पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओ के लिए नयी सौगात लेकर आया है. नए साल से हिन्दुओ को अपनी शादी रजिस्टर करने और कोई अलगाव होने पर उसको अदालत में चुनौती देने का अधिकार मिल गया है. यहाँ की सीनेट ने हिन्दुओ के लिए मैरिज एक्ट को मंजूरी दे दी है. यहाँ के हिन्दू पिछले कई सालो से मैरिज एक्ट को मंजूर करने की मांग कर रहे थे.

पाकिस्तान के अख़बार ‘डॉन’ के मुताबिक पाकिस्तान के उच्च सदन सीनेट से हिन्दू मैरिज एक्ट को मंजूरी मिल गयी है. सीनेट में इस एक्ट पर पहले बहस हुई इसके बाद मानवाधिकार समिति ने बिल को मंजूरी दे दी. नसरीन जलील की अध्यक्षता में जब एक्ट को मंजूरी दी गयी तब पुरे सदन में बैठे नेताओं और मंत्रियो ने मेज थपथपाकर इसका स्वागत किया.

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हिन्दू मैरिज एक्ट को पाकिस्तान के नीचले सदन, नेशनल असेंबली में पहले ही पास किया जा चूका है. सीनेट में पास होने के बाद नेशनल असेंबली में हिन्दुओ के नेता राकेश कुमार ने ख़ुशी व्यक्त की. उन्होंने कहा की यह पाकिस्तान के हिन्दुओ के लिए नए साल का तोहफा है. यह मैरिज एक्ट सिंध को छोड़कर पुरे पाकिस्तान में मान्य होगा. चूँकि सिंध में पहले ही एक मैरिज एक्ट पास किया जा चूका है इसलिए इस एक्ट को वहां लागु नही किया जाएगा.

पाकिस्तान के भारत से अलग होने के बाद से ही हिन्दुओ के लिए शादी कानून लागु करने की मांग उठती रही है. इस एक्ट के पास होने से पहले पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिन्दुओ की शादी रजिस्टर नही होती थी. इसके अलावा उनको किसी विवाद होने की स्थिति में कानून की मदद भी नही मिल पाती थी. इस एक्ट के पास होने के बाद अब हिन्दू अपनी शादी रजिस्टर करा सकेंगे और तलाक या किसी अन्य विवाद स्थिति में , अदालत में शादी का प्रमाण पत्र दिखाकर अपना पक्ष रख सकेगे. इसके अलावा इस एक्ट में ,पत्नी की मृत्यु होने के छह महीने के उपरांत दूसरी शादी करने का भी अधिकार दे दिया गया है.

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