भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए उनके पहले गुरु गुरुनानक देव की कर्मस्थली करतारपुर तक आसान पहुँच बनाने के बाद अब पाकिस्तान ने सोमवार को शारदा पीठ कॉरिडोर को खोलने के लिए हरी झंडी दे दी है। कश्मीरी पंडितों का एक समूह शारदा पीठ कॉरिडोर को खुलवाने की मांग काफी दिनों से कर रहा था।

दरअसल, यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है जो लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) में आता है। यही नहीं, जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा में रहे राजनीतिक दल जैसे पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी इसे लेकर अपनी आवाज उठाती रही है।शारदा पीठ मंदिर पाक प्रशासित कश्मीर (पीओके) में स्थित है।

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कश्मीर के कुपवाड़ा से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर के विषय के बारे में माना जाता है कि शारदा पीठ मंदिर हिंदुओं का करीब पांच हजार साल पुराना धर्मस्थल है। इतिहासकारों के मुताबिक महाराज अशोक ने इसे 237 ईसा पूर्व में इसका निर्माण कराया था।

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शैव संप्रदाय की शुरुआत करने वाले आदि शंकराचार्य और वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक रामानुजाचार्य दोनों ने ही यहां महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। शंकराचार्य यहीं सर्वज्ञपीठम पर बैठे तो रामानुजाचार्य ने यहां ब्रह्म सूत्रों पर अपनी समीक्षा लिखी।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शारदा पीठ तक करतारपुर कॉरिडोर की तरह ही एक कॉरिडोर विकसित करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल होने के अलावा, शारदा पीठ जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ऐतिहासिक रूप से ज्ञान और सीखने का गढ़ रहा है। उन्होंने कहा था, ‘करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत को कश्मीरी पंडित समुदाय शारदा पीठ तक तीर्थाटन करने की संभावना के तौर पर देख रहे हैं।’

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