Friday, September 24, 2021

 

 

 

न्यूजीलैंड मस्जिद हमला: गोरे आतंकी से बंदूक छिनने वाले युवक को पाक सरकार करेगी सम्मानित

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पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में शुक्रवार हो हुए भयानक आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले अपने नागरिक नईम राशिद को मरणोपरांत राष्ट्रीय पुरस्कार देने का ऐलान किया है। नईम ने अपनी मृत्यु से पहले हमलावर को रोकने की कोशिश की थी।

पाकिस्तान के ऐबटाबाद के जिन्नाबाद के रहने वाले नईम न्यूजीलैंड में प्रोफेसर थे। वह अलनूर मस्जिद पर हमले के समय वहां मौजूद थे। शुक्रवार को हुए हमले में 50 नमाजियों की मौत हो गई थी, इनमें पाकिस्तान के नौ नागरिक शामिल हैं।

प्रधानमंत्री इमरान खान ने मृतकों के परिवारों को समर्थन दिया और एक पाकिस्तानी को पुरस्कार देने की भी घोषणा की, जिसकी बंदूकधारी से संघर्ष के दौरान मौत हो गई थी।

इमरान खान ने रविवार को ट्वीट किया, “हम क्राइस्टचर्च में आतंकवादी हमले के पाकिस्तानी पीड़ितों के परिवारों को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तान को मियां नईम राशिद पर गर्व है। उनकी हमलावर से निपटने की कोशिश में मौत हो गई थी। उनके साहस को राष्ट्रीय पुरस्कार से पहचाना जाएगा।”

इससे पहले शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट किया, ‘यह उसी बात को दोहराता है जो हम हमेशा कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। पीडि़तों और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं।’खान ने कहा कि 9/11 हमले के बाद इस्लाम के खिलाफ नफरत की भावना बढ़ना आतंकवाद के इस कृत्य के लिए जिम्मेदार है और मुसलमानों को जान-बूझकर खलनायक बनाया गया है।

उन्होंने कहा,’मैं 9/11 के बाद इस्लाम के खिलाफ नफरत की भावना बढ़ने को इन आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराता हूं। अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद इस्लाम और 1.3 अरब मुसलमानों को किसी भी मुसलमान के किए आतंकवाद के किसी भी कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। मुसलमानों के वैध राजनीतिक संघर्ष को नकारात्मक दिखाने के लिए भी जान-बूझकर यह किया गया।’

ऑस्ट्रेलिया में जन्मे 28 वर्षीय ब्रेंटन टेरेंट टेरेंट ने शुक्रवार को दो मस्जिदों में गोलीबारी कर 50 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले में बांग्लादेश की क्रिकेट टीम बाल-बाल बच गई थी। हमलावर पूर्व फिटनेस ट्रेनर है। पेशी के दौरान उसने कई बार अदालत में मौजूद मीडिया की ओर देखा। वह लगातार मुस्कुरा रहा था। सुरक्षा कारणों के चलते सुनवाई बंद कमरे में हुई।

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