यमन युद्ध में अब पाकिस्तान की भी एंट्री होने जा रही हैं. हालांकि पाकिस्तान सीधे तौर पर इसमें हिस्सा नहीं ले रहा हैं. पाकिस्तान अपनी सेना की एक टुकड़ी यमन से मिलने वाली सऊदी अरब की सरहदों की हिफाजत के लिए नियुक्त करेगा.

“द मिडिल ईस्ट आई” के अनुसार, ये सैनिक सऊदी अरब की दक्षिणी सीमा के भीतर तैनात होंगे. इन सैनिकों को सऊदी सीमा के बाहर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. ये फैसला पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के दिसंबर 2016 में सऊदी अरब के तीन दिवसीय दौरे के बाद लिया गया हैं.

ध्यान रहे 2 साल पहले सऊदी अरब के यमन के ख़िलाफ़ हवाई हमले में पाकिस्तान को शामिल करने के निवेदन को पाकिस्तानी संसद नकार चुका हैं. पाकिस्तान ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इस युद्ध में वह हिस्सा नहीं लेगा. इस तरह के युद्ध का उद्देश्य मुसलमानों को फुट डालकर आपस में लड़ाने के लिए हैं.

किस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज ने कहा था कि यमन युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य भागीदारी होती हैं तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ उनकी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं. वास्ताव में यह मतों की लड़ाई है जिसका उद्देश्य मुसलमानों के बीच फूट डालकर विभाजित करना हैं. उन्होंने कहा कि यमन युद्ध में भाग लेने का अर्थ यह है कि हम स्वयं पाकिस्तानी जनता के बीच युद्ध की चिंगारी भड़काएं इसलिए किसी भी तरह यह उचित नहीं है कि पाकिस्तान यमन युद्ध में भाग ले.

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