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फिलिस्तीनी इसाई नेताओं ने भी ट्रम्प के फैसले के खिलाफ नाराज़गी ज़ाहिर की है. क्रिसमस के मौके पर सभी फिलिस्तीनी ईसाईयों ने जमकर ट्रम्प प्रदर्शन के खिलाफ नाराज़गी ज़ाहिर की. प्रदर्शन रैली के खिलाफ नेताओं ने इस फैसले को “ख़तरनाक” और “अपमानजनिक” कहा है.

6 दिसम्बर को ट्रम्प ने येरुशलम को इजराइल की राजधानी बनाने का एलान किया था, तब से ही पूरी दुनिया में आक्रोश का माहौल जारी है. ट्रम्प के फैसले से इस्लामिक दुनिया ने गहरी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहा है.

येरुशलम के ओर्थोडॉक्स चर्च के मुख्य पादरी ने कहा कि “ट्रम्प के इस कदम से ईसाई और इस्लामिक दुनिया में एक तरह का आक्रोशित माहौल बन गया है, क्यूंकि येरुशलम इस्लाम, ईसाई और यहूदियों की पवित्र जगह है, और यहाँ के लोग इसे किसी भी कीमत पर इजराइल को कब्ज़ा करने नहीं देंगे.”

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उन्होंने यह भी बताया कि “हम, फिलिस्तीनी, ईसाई और मुस्लिम येरुशलम के हक में डट कर खड़े रहेंगे और इजराइल के नापाक इरादों को कभी पूरा होने नहीं देंगे.”

“एकजुटता” का पैगाम

क्रिसमस के मौके पर लोगों ने ज्यादा से ज्यादा तादाद में “एकजुटता” दिखाते हुए रैली निकाली और एकजुट हो कर ट्रम्प के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कही. क्रिसमस के मौके पर मुस्लिमों ने भी रैली में हिस्सा लिया और येरुशलम के लिए अमन, भाईचारा और रहें के पैगामों के साथ बढाया.

वहीँ प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा की वो राज्य में शांति चाहते है और इस शांति में रुकावट लाने वालों के खिलाफ हम हर दम आवाज़ उठाते आयें है और उठाते रहेंगे. लोगों ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि आज पूरी दुनिया के मुसलमान हमारे हक में खड़े है.

येरुशलम फैसले पर पूरी ही दुनिया ट्रम्प के खिलाफ खडी है, और फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन में हर तरह का आपसी मदभेद मिटा कर एकजुटता दिखा रहे है. चर्च के पादरी का कहना है कि हम क्रिसमस के जश्न पर हर किसी को आमंत्रित कर रहे और “एकजुटता” का पैगाम दे रहे है.