Now Pakistan's nefarious ploy to appease China

इस्लामाबाद,पाकिस्तान आए दिन अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाक अब अपने कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को संवैधानिक दर्जा देने की तैयारी कर रहा है। पाक के इस नए कदम से भारत की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत इस क्षेत्र को विवादित कश्मीर क्षेत्र का ही हिस्सा मानता है।

माना जा रहा है कि यह काम वह अपने दोस्त चीन को खुश करने के लिए कर रहा है, जिसने रणनीतिक क्षेत्र से होकर गुजरने वाले 46 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी आर्थिक गलियारे को लेकर पाक से अपनी चिंता जाहिर की थी। उत्तर में सिर्फ गिलगित-बाल्टिस्तान ही एक ऐसा रणनीतिक क्षेत्र है, जो चीन से सीधे जुड़ता है।

यह चीन-पाक आर्थिक गलियारे का भी अहम रास्ता है, जिससे पश्चिमी चीन और दक्षिणी पाकिस्तान के सड़क नेटवर्क, हाईवे, रेलवे और निवेश पार्क समेत ग्वादर बंदरगाह जुड़ते हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, चीन की चिंता को ध्यान में रखते हुए एक समिति इस योजना पर काम कर रही है।

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दरअसल भारत ने आर्थिक गलियारे के पाक के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरने पर आपत्ति जताई थी। पाक अधिकारी के मुताबिक, ‘कई प्रस्तावों में से एक प्रस्ताव इस क्षेत्र को संवैधानिक दर्जा देना भी है। मगर नियमित प्रांत का दर्जा फिर भी नहीं मिल पाएगा। इस प्रस्ताव को संसद में पेश किया जाएगा।’ अगर यह लागू हो गया तो यह पहाड़ी क्षेत्र पाक के संविधान में पहली बार दर्ज हो जाएगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नया दर्जा देने से पाक के कश्मीर पर अपने परंपरागत रवैये में बदलाव से काफी दूरगामी असर देखने को मिलेगा, जिससे भारत के साथ तनाव और बढ़ सकता है। पीओके दो हिस्सों में बंटा हुआ है। एक तो ‘आजाद कश्मीर’ और गिलगित-बाल्टिस्तान। दोनों क्षेत्रों की अपनी-अपनी विधानसभाएं हैं।

तकनीकी रूप से यह हिस्सा पाक के संघीय ढांचे का हिस्सा नहीं है। पाक अपने कब्जे वाले इस क्षेत्र का प्रशासन कश्मीर के लिए विशेष मंत्री और साझा परिषदों के जरिए चलाता है। आंतरिक तौर पर दोनों क्षेत्र स्वतंत्र हैं, मगर उनके विदेश और रक्षा मामले पाक द्वारा नियंत्रित हैं। हालांकि पाक परंपरागत तौर पर कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानता आया है और वह अपने उस रुख पर भी कायम है कि 1948-49 के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत जनमत संग्रह कराना चाहिए।

साभार अमर उजाला