Saturday, June 19, 2021

 

 

 

मैंने आतंकवाद को नहीं सांप्रदायिक शांति और एकता को बढ़ावा दिया: जाकिर नाईक

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विवादित सलाफ़ी जाकिर नाइक ने अपने ऊपर लगे आरोपो को लेकर बुधवार को दावा किया कि उसने कभी भी आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दिया है और उसका मकसद हमेशा सांप्रदायिक शांति और एकता को बढ़ावा देना रहा है।

नाईक ने बयान जारी कर कहा कि मैं मलेशिया सरकार को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मेरे नजरिए को निष्पक्ष तरीके से देखा और मलेशिया के प्रधानमंत्री तुन डॉ मताहिर मोहम्मद को भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे मलेशिया में रहने की इजाजत दी। उनके फैसलों ने मुझे मलेशिया के न्यायपूर्ण और सांप्रदायिक सद्भाव वाले माहौल पर ज्यादा विश्वास जताने का मौका दिया है और इस देश की विविधतापूर्ण संस्कृति पर मेरा भरोसा और प्रगाढ़ किया है। मैं मलेशिया के इस संतुलन को बिगाड़ने के विषय में सोच भी नहीं सकता और किसी भी तरह इस देश का कानून तोड़ने के बारे में सोच नहीं सकता। क्योंकि ये मेरा दायित्व है कि इस देश के लोगों के बीच बने सामाजिक सद्भाव को किसी भी तरह नुकसान न पहुंचाऊं।

जाकिर नाईक ने हाल ही में मोहम्मद से मुलाकात की थी जिन्होंने नाईक को प्रत्यार्पित करने के भारत के अनुरोध को खारिज कर दिया है और कहा है कि उन्होंने उनके देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। न्यूज़ स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होने कहा कि उनकी सरकार हमेशा इस बात को तय करेगी कि वो इस तरह की किसी मांग पर प्रतिक्रिया देने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें, ‘वरना किसी को नुकसान पहुंच सकता है।’

जाकिर नाईक ने कहा मीडिया में इस तरह की खबरों की बाढ़ आई है जिसमें मेरे मलेशिया में रहने को लेकर बातें कही जा रही हैं। मीडिया का कुछ वर्ग मुझ पर इलजाम लगा रहा है कि मैंने आतंकवाद को शह देने की कोशिश की है। इस तरह की खबरों के जरिए इस्लाम और मुस्लिमों के बारे में एक धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है। जब उन्हें मेरे खिलाफ किसी तरह के सबूत नहीं मिले तो उन्होंने मेरे खिलाफ वीडियो क्लिप्स में कांट-छांट करके, मेरे कथनों को गलत तरीके से पेश करके मुझे आतंकवाद को शह देने वाला, हेट स्पीच और यहां तक कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अभियुक्त बनाने की कोशिश की।

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पिछले कई सालों में हजारों ऐसे समाचार आर्टिकल्स, यू ट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट मेरे बारे में बताए गए लेकिन उनसे मेरा कोई संबंध नहीं रहा, यहां तक कि गलत बयानों के साथ मेरी तस्वीरों का इस्तेमाल भी किया गया। ये उन्हीं लोगों द्वारा किया गया जो चाहते हैं कि इस्लाम को शांति का मजहब साबित न किया जा सके। ये लोगों का विश्वास इस्लाम धर्म से ऊपर हटाने के उद्देश्य से किया जा रहा है और इसके लिए खराब तरीके अपनाए जा रहे हैं। मैं साफ करना चाहता हूं कि मानवता के खिलाफ किए गए किसी भी तरह के बयान को मैंने नहीं दिया है और इसे तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है। मैं हमेशा समय समय पर ये कहता रहता हूं कि एक मुस्लिम अच्छा मुस्लिम तब तक नहीं हो सकता जब तक वो अच्छा इंसान न हो।

अगर निष्पक्ष नजरिए से देखा जाए तो मेरे 25 साल के इस्लाम और शांति के लेक्चर्स में मैंने कभी इस्लाम या और किसी के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देने की बात नहीं की। यहां तक कि सितंबर 2012 तक मेरे खिलाफ किसी गैर मुस्लिम ने किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई कि मैंने उनके धर्म के विरुद्ध कोई प्रयास किया हो। मैंने हमेशा सांप्रदायिक शांति और सौहार्द के लिए काम किया है जो कि मेरे खिलाफ बनाई जा रही इमेज के एकदम विपरीत है।

जब मैं अपने देश भारत लौटूंगा तो इसके बाद भी मैं मलेशिया का शुक्रगुजार रहूंगा कि न सिर्फ वहां मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया गया बल्कि एक ऐसे शख्स की तरह मुझे देखा गया जो इंसानियत को प्यार करता है। मैं अल्लाह से इबादत करूंगा कि वो मलेशिया राष्ट्र पर पर अपनी कृपा बनाए रखे और दुनिया के बाकी देशों से अलग मलेशिया को एक सुपरपावर की तरह आगे बढ़ाए।

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