Thursday, October 21, 2021

 

 

 

‘तकफीरी इंसानियत के नही बल्कि अल्लाह के भी दुश्मन’

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जो सबसे ऊँचे पहाड़ के शिखर पर पहुँचना चाहता है उसको रास्ते की छोटी छोटी पहाड़ियों को पार करना होगा, जो अपने को शिया, सुन्नी और कौमों का शत्रु बताता है यहां तक कि एसी मंजिल पर पहुँचता है कि खुद को इंसानियत का दुश्मन बताता है, निःसंदेह उनका अंतिम लक्ष्य खुदा की दुश्मनी तक पहुँचना है।
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तकफीरियों और उनकी परंपराओं और रस्मों में शैतानी स्वभाव हर देखने वाले के लिए स्पष्ट है, और उनकी खून की प्यास जो दूसरो की हत्या और खून पीने से ही बुझती है, यह एक ऐसी सच्चाई है जो किसी से छिपी नहीं है। जंगली जानवरों का स्वभाव रखने वाला इंसानी सूरत का यह गुट अपने बीमार लक्ष्यों को पाने के लिए चमगादड़ की भाति खून चूसता है, और इसके लिए उसने धर्म को अपना हथियार बनाया है और इस प्रकार इस्लाम को बदनाम करने की ज़ायोनी मांग को पूरा किया है।

तकफीर और अंधी कट्टरता को आधी शताब्ति बीत रही है, और तकफीरियत जो आरम्भ में केवल कुछ गिनती के लोगों में दिखती थी, आज कुछ विशेष स्कूलों में उसकी शिक्षा दी जा रही है और उसकी खास लॉबी और पार्टी है, जिनके वित्तीय और राजनीतिक समर्थन से वह अपने अपराधों पर पर्दा डाल सकते हैं। उनके व्यवहार के पीछे कोई तर्क नहीं है, तकफ़ीरी और आतंकी गुटों का गठन तेल अवीव के मौत के एजेंटों से समन्वय रखता है, ताकि इस्लामी हुकूमत की हर गिरती दीवार के साथ फिलिस्तीन की पवित्र धरती पर एक अतिक्रमणकारी दीवार बना सके।

तकफीरियों ने खुल्म खुल्लाह खुदा से शत्रुता का झंडा उठा रखा है। वह खुदा जिसने इंसानी जीवन को सम्मान दिया है और किसी की भी बिना कारण हत्या करने से मना किया है, लेकिन खेद है कि यह ब्रेन वाश हो चुके दिमाग अल्लाह की इन स्पष्ट निशानियों को नहीं देख पा रह हैं।

विनाश और जनसंहार उनकी निशानी है, और कोई भी महिला या बच्चा उनके खूनी स्वभाव से सुरक्षित नहीं है। शैतानी सूरत वाले इन इंसानों से तकफीरी विचारधारा की गंदगी को देखा जा सकता है। लेकिन जिस चीज़ ने हमको आशावादी बना रखा है वह है तकफ़ीरी विचारधारा की समाप्ति का अल्लाह का वादा। वह वादा जिसको पूरा करेंगे और हम अपनी वीरता से उनको अपने पैरों तले कुचल देंगें।

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