नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने कहा कि भारत और पाकिस्तान बड़े देश हैं और वे बगैर किसी बाहरी मदद के खुद ही द्विपक्षीय तनावों को कम कर सकते हैं।

दिल्ली में नार्वे के दूतावास में एक नए हरित परिसर का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भारत-पाक को किसी बाहर वाले की मदद की जरूरत नहीं है। दोनों देशों में पर्याप्त क्षमता है। 

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उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत को लेकर कोई पहल होती है तो यकीनन उसमें कई देश मध्यस्थता कर सकते हैं। जब सोलबर्ग से यह पूछा गया कि कश्मीर घाटी में सैन्य समाधान संभव है तो उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से यह नहीं मानती कि सैन्य तरीके से समस्याओं का हल हो सकता है। मैं शातिपूर्ण समाधान में विश्वास रखती हूं।

भारत में नियुक्त नॉर्वे के राजदूत निल्स रैगनर काम्सवाग ने बाद में एक ट्वीट में यह स्पष्ट किया कि सोलबर्ग ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ बनने की पेशकश नहीं की है। बता दें कि सोलबर्ग तीन दिवसीय दौरे पर सोमवार सुबह भारत आई हैं।

वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकत करेंगी। सोलबर्ग ने स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि सतत विकास की चुनौतियों से निपटने के लिए इस अभियान की जरूरत थी। 

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