आतंकवाद को धर्म से जोड़ने की आलोचना करते हुए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि कोई भी मुसलमान और कोई भी ईसाई आतंकवादी नहीं होता.

उन्होंने कहा कि एक बार आतंकवाद को अपना लेने के बाद कोई व्यक्ति धार्मिक नहीं रहता. उन्होंने कहा,  “लोग जब आंतकवादी बनते हैं तो उनकी मुस्लिम, ईसाई या अन्य पहचान समाप्त हो जाती है.”

 मणिपुर में अपने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन उन्होंने बताया कि उन्हें उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा पसंद नहीं है.

बौद्ध धर्मगुरु ने हिंसा से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने कहा, हमारी जितनी भी समस्या है, वह हमने खुद पैदा की है.। हमें भावनाओं पर काबू पाना सीखना होगा. गुस्सा सेहत के लिए नुकसानदेह है.

उन्होंने कहा कि दुनिया की समस्याओं को बातचीत के द्वारा सुलझाया जा सकता है. भारत अपने प्राचीन ज्ञान व शिक्षा से दुनिया में शांति स्थापना सुनिश्चित कर सकता है. चीन के साथ उनके मतभेद पर उन्होंने कहा, चीन अगर साम्यवादी विचारधारा को छोड़ दें तो इस तरह की संभावनाएं हैं.

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