रोहिंग्या मुस्लिमों का जातीय सफाया करने वाली म्यांमार सेना ने अब मुसलमानों के धार्मिक स्थानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया हैं. म्यांमार की सेना ने अब देश की एक ऐतिहासिक मस्जिद को पूरी तरह से शहीद कर दिया हैं.

म्यांमार के बूटिंग क़स्बे के बाज़ार में स्थित 1990 के दशक में बनी इस मस्जिद में स्थानीय मुसलमान इबादत करते थे. लेकिन म्यांमार सेना द्वारा देश में मुसलमानों के जातीय सफ़ाए की शुरूआत के बाद म्यांमार की सरकार ने इसे बंद कर दिया था.

सरकारी संरक्षण में जारी मुस्लिमों के कत्लेआम पर मानवता के खामोश बेठे हैं. दुनिया के सबसे पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय का जातीय सफ़ाया जारी है और बौद्ध चरमपंथी एवं सैनिक मुसलमानों की बस्तियों को आग के हवाले कर रहे हैं और बच्चों एवं महिलाओं समेत उन्हें बड़ी संख्या में मौत के घाट उतार रहे हैं.

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वहीँ म्यांमार की वरिष्ठ नेता आंग सांग सूकी देश में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों के हनन और उनके जातीय सफ़ाए का खंडन कर रही हैं. जबकि लाखों लोग अपनी जान बचाने के लिए पलायन कर रहे हैं.

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