पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी बेल्जियम की यात्रा के दौरान एक बार से कश्मीर के मुद्दे को उठाया और कहा कि अगर भारत ने अपने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का वादा पूरा किया, तो कश्मीर के लोग पाकिस्तान को ही चुनेंगे।

एक टीवी को दिए गए इंटरव्यू में उन्होने कहा,  यदि कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया गया तो वो पाकिस्तान को चुनेंगे। क्योंकि वह मुस्लिम बहुल प्रांत है। इसके साथ ही उन्होने ये भी कहा कि जब तक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शासन है तब तक ये मसला हल होने वाला नहीं है।

उन्होने मोदी सरकार की तुलना नाजियों से करते हुए कहा कि भारत में जब तक नाज़ियों से प्रभावित होकर बने आरएसएस के समर्थन वाली मोदी सरकार’ है, तब तक उन्हें इस मसले के हल की उम्मीद नहीं दिखती। उन्होने कहा, कश्मीर मुद्दे को सुलझाना भारत और पाकिस्तान दोनों के हित में होगा।

इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच तीन बार युद्ध हुए हैं। कश्मीर दक्षिण एशिया के इन दो बड़े देशों के संबंध सामान्य होने की राह में बड़ा मसला रहा है। यह व्यापार और समृद्धि की राह में मुख्य बाधा है। अगर दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होंगे, कारोबार अच्छा होगा, तो दोनों को अपने यहां गरीबी कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के इस तरह के दावों का भारत खंडन करता है और उसका कहना है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान और भारत के बीच शिमला समझौता होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के पहले के प्रस्तावों का कोई मतलब नहीं है और आपसी मसलों को दोनों देशों को बिना किसी बाहरी दखल के सुलझाना होगा।

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