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संयुक्त राष्ट्र ने दृढ़ता से अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम आबादी पर हो रहे अत्याचार के लिए म्यांमार सरकार की आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि म्यांमार से बलात्कार, हत्या और अन्य अत्याचारों की डेली रिपोर्ट मिल रही हैं.

मानवाधिकार प्रमुख जैदुल हुसैन ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण काफी कठोर हैं. अराकान में सैन्य अभियान के दौरान कम से कम 86 रोहिंग्या मारे गए और 27,000 से अधिक पलायन करने को मजबूर हुए. अधिकांश विस्थापित रोहिंग्या बांग्लादेश में सीमा पार जाने को मजबूर हुए हैं.

Burmese security forces near Wa Peik Village.

जैदुल हुसैन ने कहा कि म्यांमार सरकार ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची के नेतृत्व में एक “अदूरदर्शी, उल्टा, यहां तक कि कठोर” संकट का दृष्टिकोण ले लिया है. मंगलवार को, ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि प्राप्त सबूत से पता चला म्यांमार के मुसलमानों से संबंधित गांवों में अत्याचार के पीछे सैन्य बल है.

न्यूयॉर्क स्थित संगठन ने कहा कि अक्टूबर 2015 के बाद से राखिने में, रोहिंग्या मुसलमानों की 1,500 इमारतों को नष्ट कर दिया गया हैं. कारवाई के साथ ही म्यांमार सरकार अशांत क्षेत्रों में मीडिया को भी जाने की अनुमति नहीं दी रही हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) को मिली सेटेलाइट तस्वीरों के अनुसार सैन्य बलों ने राखिने में रोहिंग्या मुसलमानों के गाँवों को नष्ट करने के लिए उन्हें जला दिया हैं.


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