शुक्रवार को सुबह न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिद में हुए आतंकी हमले में अब तक कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 48 से ज्यादा लोग जख्मी बताए जा रहे हैं। इस हमले को अंजाम देने वाले 28 वर्षीय ब्रेंटन टैरंट को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हैवानियत से भरे इस हमले की चश्मदीद अब हकीकत बयान कर रहे है। इस दौरान ये भी सामने आया कि एक शख्स लोगों की जान बचाने के लिए हमलावर से भीड़ गया था। स्थानीय मीडिया की मानें तो हमलावर मुसलमानों को लेकर बेहद खराब बातें बोल रहा था। वह कह रहा था, ‘आज मैं तुम्हे मार डालूंगा।’ अनवर ने बताया कि वह बाथरूम के अंदर से सुन सकता था कि लोग जान बचाने के लिए उससे गुहार लगा रहे थे, लेकिन हमलावर तब तक फायरिंग करता रहा जब तक लोग मर नहीं गए।

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सैयद मजहरुद्दीन ने बताया कि एक व्यक्ति ने हमलावर से मुठभेड़ भी की। मजहरुद्दीन ने बताया, ‘वह लड़का आम तौर पर मस्जिद का काम देखता है। उसने जब देखा कि हमलावर का ध्यान कहीं और है तो उसने हमलावर को जबरदस्त धक्का दिया और उसकी बंदूक पर झपट पड़ा। इस लड़के ने बंदूक का ट्रिगर ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उसे नहीं मिला। तब तक हमलावर बाहर इंतजार कर रही कार में जाकर बैठ गया और वहां से भाग गया।’

अल-नूर मस्जिद में पूरा वाक्या देखने वाले एक चश्मदीद ने बताया, ‘एक महिला चिल्ला रही थी और हमलावर ने सीधे उसके चेहरे पर गोली चला दी।’ उसने बताया कि हमलावर ने अपने पैरों में बंदूक की मैग्जीन बांध रखी थी। एक व्यक्ति ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर इस दौरान काफी शांत नजर आ रहा था।

मिरवाइज नाम के एक अफगान रिफ्यूजी ने बताया कि मौत उसे सामने नजर आ रही थी, जब एक बोली उसके सिर के पास से गुजर गई। उन्होंने बताया, ‘उसने हमारे कमरे की तरफ फायरिंग शुरू कर दी। जब बंदूक की एक गोली मेरे सर के पास से गुजरी तो मैं जमीन पर लेट गया। अगर एक-दो सेंटीमीटर का अंतर होता तो शायद गोली मुझे लग जाती।’ मिरवाइज ने बताया कि जब हमलावर का ध्यान कहीं और था, उस समय वह वहां से भागने में कामयाब रहा।

कार्ल पॉमरे नाम का स्थानीय शख्स अपने कर्मचारी के साथ अल-नूर मस्जिद के पास से गुजर रहा था। तभी उसने देखा कि लोग मस्जिद से भाग रहे हैं और जमीन पर गिर रहे हैं। कार्ल ने अपनी गाड़ी रोकी और घायलों की मदद करने लगा। घायलों में पांच साल की एक बच्ची थी।

उसने लोकल मीडिया को बताया, ‘हम उस बच्ची को कार में लाने में सफल रहे और उसे हॉस्पिटल ले गए, जहां उसकी हालत काफी नाजुक थी। मेरा कर्मचारी जिस व्यक्ति की मदद कर रहा था, उसे हम नहीं बचा सके। घायल ने मेरे कर्मचारी के हाथों में ही दम तोड़ दिया। यह दहला देने वाला था।’

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