जनवरी में इजराइल के प्रधानमन्त्री की भारत यात्रा के दौरान भारत और इजराइल के बीच सीधी उड़ानों का समझौता हुआ था, जिस पर सऊदी अरब की मंजूरी का इंतजार दोनों देश ने किया था, क्योंकि इजराइल-भारत की डायरेक्ट फ्लाइट के लिए सऊदी अरब के एयर स्पेस की जरुरत थी, लेकिन सऊदी अरब ने इस मंजूरी के लिए मना कर दिया था, क्योंकि इजराइल और सऊदी अरब के रिश्ते कुछ ठीक नहीं थे, इजराइल के विमानों के लिए कई दशक पहले सऊदी अरब ने बैन लगा लिया था और अपने एयरस्पेस में इजराइल के विमानों को आने के लिए मना कर दिया था.

सोमवार(5 मार्च) को इजराइल के प्रधानमन्त्री बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा की “सऊदी अरब ने अपने एयरस्पेस में इजराइल-भारत की फ्लाइट को जाने की इजाजत दे दी है”, लेकिन इस बयान के कुछ ही घंटों बाद भारत की प्रमुख एयर लाइन ने कहा की “उन्हें किसी भी प्रकार का कोई अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ है.”

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टाइम्स ऑफ़ इस्राइल समाचार पत्र ने इसकी पुष्टि करने के लिए एयर इंडिया से संपर्क करके यह जानकारी पुख्ता की एयर इंडिया के प्रवक्ता प्रवीण भटनागर ने कहा की “हमें किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं मिली है, हमने बस अभी तक फ्लाइट के लिए रिक्वेस्ट पेपर जमा करवाया है, हमें अधिकारीयों से अभी तक किसी भी प्रकार का सहमती पत्र प्राप्त नहीं हुआ है.”

सोमवार को, नेतन्याहू ने संवाददाताओं से कहा कि “सऊदी अरब ने इजराइल और भारत के बीच उड़ानों पर अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने के लिए एयर इंडिया को मंजूरी दे दी है और इस समझौते से उड़ान भरने के लिए समय दो घंटों तक कम हो जाएगा और एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी होगी की जेरूसलम, रियाद के साथ अपने रिश्ते को अपग्रेड करने का प्रयास करेगा.”

वाशिंगटन, डीसी के ब्लेयर हाउस में एक ब्रीफिंग के दौरान नेतन्याहू ने कहा की “एयर इंडिया ने सऊदी अरब से  इजरायल के लिए उड़ान भरने के लिए आज एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और यह भी कहा की सऊदी एयरस्पेस से गुजरने के बाद इंडिया-इजराइल की फ्लाइट उतना ही समय लेगी जितना लन्दन से तेल अवीव के बीच लगता है, कुछ साढ़े पांच घंटों तक का समय लगेगा”. हालाँकि सऊदी अरब ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

भटनागर ने कहा कि यह संभव हो सकता है कि किसी अन्य अथॉरिटी से समझौता किया जा चुका है, लेकिन एयर इंडिया को इस तरह के समझौते के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

उन्होंने कहा की “हमें जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है.”

उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने दिल्ली और तेल अवीव के बीच सीधी उड़ान के लिए बस कागजी कार्रवाई की थी, लेकिन विवरण अभी तक तैयार नहीं किये गए हैं.

वर्तमान में एल अल ही एकमात्र एयरलाइन है जो इजराइल से सीधे भारत की उड़ान भरता है और जिसमे मार्ग तेल अवीव से मुंबई तक का है. फ़रवरी में इजराइल अखबार ने इस समझौते पर स्वीकृति होने का दावा किया था हालाँकि रियाद ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया था.

रॉयटर्स के मुताबिक एल अल ने सऊदी हवाई क्षेत्र के माध्यम से उड़ान भरने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की मांग की है, इजराइल के साथ सऊदी अरब के राजनयिक संबंध अच्छे नहीं हैं लेकिन यह रहस्य है कि 2015 के परमाणु समझौते के बाद दोनों देशों ने ईरान से साझा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर छिपकर काम किया है, जिसका दोनों सरकारों ने जोरदार विरोध किया और दोनों देश अमेरिका के करीबी हैं और ईरान के प्रतिद्वंदी.

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