Friday, July 30, 2021

 

 

 

नेपाल ने भारत-पाक पर साधा निशाना – ट्रंप और किम मिल सकते हैं, तो अन्य मुल्क क्यों नहीं

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दक्षेस शिखर सम्मेलन के आयोजन का जोरदार समर्थन करते हुए नेपाल ने शुक्रवार को कहा कि मतभेदों को बातचीत के जरिये सुलझाया जाना चाहिए और आतंकवाद तथा क्षेत्र की अन्य महत्वपूर्ण चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटा जाना चाहिए।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि मतभेदों को सुलझाने के लिये संवाद ही एकमात्र तरीका है।

विदेश नीति मामलों के विशेषज्ञों और पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा, ‘अगर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम के बीच मुलाकात हो सकती है तो अन्य देशों के नेताओं के बीच यह क्यों नहीं हो सकती।’

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बता दें कि इस बार शिखर सम्मेलन की मेजबानी की बारी पाकिस्तान की है। लेकिन भारत के शामिल न होने के कारण ये सम्मेलन नहीं हो पा रहा है। पिछले साल जम्मू कश्मीर में भारतीय सैन्य अड्डे पर भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत ने इस सम्मेलन में शरीक होने से मना कर दिया था।

जिसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान के भी इसमें हिस्सा लेने से इनकार करने के बाद सम्मेलन रद्द कर दिया गया था। मालदीव और श्रीलंका इस समूह के सातवें और आठवें सदस्य हैं। आखिरी दक्षेस शिखर सम्मेलन का आयोजन 2014 में काठमांडू में हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की थी।

शिखर सम्मेलन का आयोजन आमतौर पर दो साल में होता है, जिसकी मेजबानी अंग्रेजी की वर्णमाला के बढ़ते क्रम के अनुसार नाम वाले सदस्य देश बारी-बारी से करते हैं। शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाले सदस्य देश को संघ का अध्यक्ष माना जाता है।

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