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म्यांमार के राखिने में रोहिंग्या मुस्लिमों को कत्लेआम करने वाले बौद्ध चरमपंथियों के खिलाफ म्यांमार सरकार ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है. ये कार्रवाई सयुंक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और मुस्लिम देशों के कड़े दबाव के बाद शुरू की गई है.

मंगलवार रात को रखाइन में बौद्धों को रोकने के लिए गोलियां चलानी पड़ी. जिसमे सात लोगों की मौत हो गई. इस घटना में दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. दरअसल, हज़ारों की संख्या में बुद्धिस्ट अपने उस मंदिर के सामने एकत्रित हुए थे जो मुसलमानों पर सेना के क्रैकडाइन के दौरान बंद कर दिया गया था. अचानक वहां पुलिस और चरमपंथी बुद्धिस्टों में टकराव हो गया.

ये हिंसा क्यों भड़की अब तक इसका नहीं पता चल पाया है. इस हिंसा में एक बार गौर करने वाली है वह यह है कि जिस दिन म्यांमार और बांग्लादेश के बीच 6, 55, 000 रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस बुलाने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए उसी दिन यह सब कुछ हुआ.

म्यांमार के पुलिस प्रवक्ता कर्नल म्यो सोइ ने बताया कि सुरक्षा बलों ने उनसे जाने के लिए कहा, जिसके बाद चेतावनी देने के लिए पहले उन पर रबड़ की गोलियां चलाई गई. रबड़ की गोलियां चलाने के बाद भी जब भीड़ शांत नहीं हुई तो उन्हें मजबूरन असली गोलियां चलानी पड़ी.

उन्होंने कहा कि इस हिंसा में 7 लोग मारे गए और 13 घायल हो गए. वहीं भीड़ के पथराव करने से 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए.

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