यूएन शरणार्थी प्रमुख ने चेतावनी दी कि रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए स्वेच्छा से म्यांमार लौटने के लिए सही समय नहीं हैं क्योंकि उनकी सरकार ने अपने बहिष्कार को वापस नहीं लिया और नहीं उनके अधिकारों और नागरिकता के बारे में कुछ घोषणा की.

फिलिपो ग्रांडी ने चेतावनी दी कि जल्द ही एक और बड़ी मुसीबत आने वाली है. मार्च में मानसून का आगमन होने वाला है और बांग्लादेश में 100,000 से अधिक शरणार्थी बाढ़ या भूस्खलन से ग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे हैं.

उन्होंने कहा, “यह समय, हिंसा, विस्थापन और स्टेटलेसनेस के बार-बार होने वाले विनाशकारी चक्र को समाप्त करने का समय है – मूर्त, ठोस उपायों के जरिए व्यापक रूप से बहिष्कार को दूर करना शुरू करन होगा, जो कि रोहंग्या समुदाय ने बहुत लंबे समय तक सहन किया है.

यू.एन. उच्चायुक्त ने कहा कि यह म्यांमार की सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन ऐसा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. वहीं दूसरी और रोहिंग्या शरणार्थी भी बिना किसी सुरक्षा के म्यांमार वापस नहीं जाना चाहते है. ऐसे में अधिकार समूहों और यू.एन. का कहना है कि किसी भी प्रत्यावर्तन को स्वैच्छिक होना चाहिए.

ध्यान रहे 70000 से अधिक रोहिंगिया 25 अगस्त के बाद मुख्य रूप से बौद्ध देश से भागकर बांग्लादेश आए थे. बांग्लादेश और म्यांमार ने पिछले महीने ही दो साल की अवधि में रोहिंगिया की वापसी पर सहमति व्यक्त की है. यूएन शरणार्थी प्रमुख ने कहा कि अब पलायन काफी हद तक कम हो गया. बांग्लादेश में इस महीने केवल 1,500 शरणार्थी ही आए है.

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