म्यांमार की सेना ने अगस्त 2017 से राखिने में हुए रोहिंग्या मुस्लिमों के जनसंहार में अपने सैनिकों के शामिल होने की बात आखिर स्वीकार कर ली है. हालांकि सिर्फ़ एक मामले में यह संलिप्तता स्वीकार की है.

म्यांमार सेना के मुताबिक़, जांच में पाया गया है कि म्यांगदो के इन दीन गांव में 10 लोगों की हत्या में सुरक्षा बलों के चार जवान शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों जवानों ने प्रतिशोध के तौर पर, उनके शब्दों में ‘बंगाली आतंकवादियों’ पर हमला करने में ग्रामीणों की मदद की थी.

फेसबुक पर जारी इस पोस्ट में पहली बार राखाइन राज्य में रोहिंग्या के सामूहिक कब्रगाह की बात स्वीकार की गई है. सेना ने पिछले महीने ऐलान किया था कि वह इन दीन गांव में एक क़ब्र से मिले दस कंकालों के मामले की जांच करेगी.

सेना की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है, “यह सच है कि गांव वालों और सुरक्षा बलों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने दस बंगाली आतंकवादियों की हत्या की.” हालांकि सेना ने यह भी कहा है, “यह घटना इसलिए हुई क्योंकि आतंकवादियों ने बौद्ध ग्रामीणों को धमकाया और उकसाया था.”

बयान में कहा गया है कि घटना में लिप्त गांव के लोगों के विरुद्ध क़ानून के अनुसार कार्यवाही होगी जबकि सुरक्षा बलों को क़ानून हाथ में लेने की सज़ा दी जाएगी. ध्यान रहे सयुंक्त राष्ट्र संघ राखिने में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ म्यांमार सेना की कार्रवाही को जनसंहार की संज्ञा दे चूका है.

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