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म्यांमार ने मंगलवार को रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए एक विशाल प्रत्यावर्तन कार्यक्रम की देरी के लिए बांग्लादेश को दोषी ठहराया है. जिसके तहत लाखों रोहिंग्याओं की घर वापसी होनी थी.

ध्यान रहे पिछले अगस्त राखिने में म्यांमार सेना के अभियान के बाद 680,000 से ज्यादा लोगों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. जबकि 100000 से अधिक लोग अक्टूबर 2016 में हिंसा के बाद से ही शरण लिए हुए है.

म्यांमार ने 23 जनवरी को सहमति व्यक्त की थी कि  वह बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले से रोहिंग्याओं को वापस लेगा, लेकिन एक बांग्लादेशी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि कार्यक्रम योजना के अनुसार शुरू नहीं हो पाया.

शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मोहम्मद अबुल कलाम ने कहा कि काम करने के लिए बहुत ज्यादा काम है.  निर्वासित लोगों की संख्या को दर्ज करने की जटिल प्रक्रिया ने शरणार्थियों को संदेह में डाला हुआ है.

इस प्रक्रिया के तहत एक सप्ताह में सिर्फ 1500 लोगों की म्यांमार वापसी होगी. इन लोगों के लिए म्यांमार सरकार ने सीमा पर दो शिविरों का निर्माण कराया है. म्यांमार के अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार की दोपहर तक कोई  रोहिंग्या नही आया.

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री कैओ टिन ने म्यांमार की राजधानी में नेपीडॉ में संवाददाताओं से कहा, “हम अभी उन्हें लेने के लिए तैयार हैं … हम समझौते के अनुसार उनका स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.”  उन्होंने कहा, “हमने यह खबर देखी है कि बांग्लादेश अभी तैयार नहीं है, लेकिन हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.”

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