Thursday, October 28, 2021

 

 

 

रोहिंग्या मुस्लिमों की हालत सुधारने में नाकाम रहा म्यांमार: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता प्रमुख ने कहा है कि उन कारणों से निपटने में कोई प्रगति नहीं हुई है, जिनकी वजह से पश्चिम म्यामां के रखाइन प्रांत से सात लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश गये हैं.

हाल में बांग्लादेश से लौटे संयुक्त राष्ट्र राहत प्रमुख मार्क लोकॉक ने सोमवार को कहा कि म्यामां ‘‘विश्वास पैदा करने के उन कदमों को उठाने में नाकाम रहा है, जिनसे लोगों को यह यकीन हो सके कि वापस जाना सुरक्षित होगा।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने जितने शरणार्थियों से बात की, उन सभी को यह नहीं लगता कि वापस जाना सुरक्षित है. वे कहीं भी आने जाने की स्वतंत्रता और शिक्षा, रोजगार एवं सेवाओं तक पहुंच जैसी चीजों के प्रति आश्वस्त होना चाहते हैं।

लोकॉक ने संवाददाताओं से कहा कि बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए 96 करोड़ 20 लाख डॉलर की मदद संबंधी संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद केवल 17 प्रतिशत आर्थिक मदद की मिल पाई है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि विश्व की इसमें रुचि संभवत: कम हो रही है।”

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वहीं बांग्लादेश के शरणार्थी राहत और प्रत्यर्पण कमिश्नर अब्दुल कलाम ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि “हालात जैसे के तैसे हैं। रोहिंग्या शरणार्थियों की देश वापसी के बाबत कोई प्रगति मैंने अब तक नहीं देखी है। यूएन के तीन प्रमुखों की यात्रा निसंदेह वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित करेगी”

उन्होंने कहा कि “इसी की तरह कई उच्च स्तर की यात्रा हुई है लेकिन हालात वैसे ही है जैसे साल 2017 की शुरुआत में थे। यूएन को म्यांमार पर दबाव डालने की जरुरत है कि वह अपने नागरिकों को वापस ले लेकिन वैश्विक संस्था न ऐसा करती दिख रही है या करने में असमर्थ है।”

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