अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो मैराडोना (Diego Maradona) का गुरुवार को निधन हो गया है। डिएगो मैराडोना का ब्यूनस आयर्स में दिल का दौरा पड़ने से 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अर्जेंटीना में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।

मैराडोना ने चार फीफा वर्ल्ड कप खेले। इनमें से मैराडोना ने अर्जेंटीना को 1986 में विश्व विजेता बनाया था। इसमें मैराडोना ने अहम भूमिका निभाई थी। मैराडोना गरीब परिवार में जन्मे थे। हालांकि, जो शोहरत, पैसा और मुकाम मैराडोना ने हासिल की, उसकी कोई खिलाड़ी बस कल्पना ही कर सकता।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अर्जेंटीना के एक स्लम से अपनी जिंदगी का सफर शुरू करने वाले मैराडोना ने जब 1986 में अपने देश को फुटबाल विश्व कप जिताया, तब उन्हें साथी देशवासियों चे गवेरा और एविटा पेरॉन (फर्स्ट लेडी ऑफ अर्जेंटीना) के बराबर दर्जा दिया।

माराडोना उपनिवेशवाद और विदेशी कब्जे के खिलाफ अपने रुख के लिए भी प्रसिद्धि रहे। उन्हें साम्राज्यवाद-विरोधी और दुनिया भर में प्रगतिशील आंदोलनों का एक बड़ा समर्थक माना जाता है। फिलिस्तीनी के लिए माराडोना का स्नेह और अप्राप्य समर्थन सर्वविदित है।

दो साल पहले 2018 विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास के साथ एक बैठक में कहा, “मेरा दिल फिलिस्तीनी है।” माराडोना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अब्बास के साथ बैठक की एक तस्वीर पोस्ट की।

उन्होने तस्वीर के साथ लिखा था, यह आदमी फिलिस्तीन में शांति चाहता है। अब्बास के पास खुद का एक देश है और एक अधिकार है। यह एकमात्र समय नहीं था जब उन्होंने समर्थन व्यक्त किया। 2012 में, माराडोना ने खुद को “फिलिस्तीनी लोगों का नंबर एक प्रशंसक” बताया।

उन्होंने कहा, “मैं उनका सम्मान करता हूं और उनके साथ सहानुभूति रखता हूं। मैं बिना किसी डर के फिलिस्तीन का समर्थन करता हूं।” दो साल बाद, कम से कम 2,500 फिलिस्तीनियों की हत्या करने वाले गाजा पट्टी पर इजरायल के हमले को लेकर माराडोना ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इजरायल की आलोचना की। उन्होंने एक बयान में कहा, “इजरायल फिलिस्तीनियों के लिए जो कर रहा है वह शर्मनाक है।”

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