tazia

इस्लाम धर्म के पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे हजरत इमाम हुसैन (रजि.) और उनके साथियों की कर्बला मे हुई शहादत की याद में मुस्लिम समुदाय ताजिया निकालकर उनकी शहादत को याद करता है। ताजियादारी का ये रिवाज आमतौर पर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में देखने को मिलता है।

पाकिस्तान के पुराने कराची शहर इलाके में इस मौके पर एक बड़ी मिसाल देखने को मिलती है। दरअसल, यहाँ तीन पीड़ियों से मंदिर में ताज़िये बनाए जाते है और बनाने वाले भी हिन्दू ही होते है। पुराने कराची शहर इलाके में कम से कम दो प्राचीन हिंदू मंदिरों में हिंदू समुदाय पूरे जोश एवं उत्साह से ताजिया बनाता है।

कराची के हिंदू बहुल नारायणपुरा इलाके के राजेश बताते है कि “हम पिछली तीन पीढ़ियों से ये ताजिया बना रहे हैं और इस पर हम गर्व महसूस करते हैं।” अकबर रोड पर कुछ मील दूरी पर बने 100 साल पुराने मरीमाता मंदिर के प्रांगण में भी हिंदू समुदाय का ताजिया होता है।

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इस प्राचीन मंदिर के प्रांगण का एक हिस्सा हर साल ताजिया बनाने के लिए आरक्षित रखा जाता है। भारत में आमतौर पर हिन्दू समुदाय की हजरत इमाम हुसैन (रजि.) को लेकर अक़ीदत देखने को मिलती है। ग्रामीण इलाकों में बेहद ही सम्मान के साथ हिन्दू समुदाय भी ताजिया निकालता देखा जा सकता है।

वहीं दूसरी और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम मुल्क में हिन्दू समुदाय का पीड़ी दर पीड़ी ये काम काबिल ए तारीफ है। जो आपसी भाईचारे को मजबूत करता है।

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