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इस्लामाबाद: आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के 1800 से ज्यादा उलेमाओं ने फतवा देकर बड़ी मिसाल कायम की है.

इस्लामाबाद की इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में पैग़ाम ए पाकिस्तान के तहत ये फतवा जारी किया गया है. इस फतवे पर 1829 उलेमाओं ने दस्तखत किये. फतवे में इस्लाम के नाम पर की जा रही हिंसा को हराम करार दिया गया है.

इस दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि इस्लाम की सच्ची शिक्षा के प्रकाश में किया गया यह निर्णय उनका हृदय परिवर्तन कर देगा और उनके उद्धार का मार्ग प्रशस्त करेगा. साथ ही हुसैन ने किताब में लिखा है कि यह फतवा एक उदार इस्लामिक समाज की स्थिरता का मजबूत आधार स्थापित करने के लिए है.

फतवे में सशस्त्र संघर्ष को देश, उसकी सरकार अथवा सशस्त्र बलों के खिलाफ बताया गया है. इसमें कहा गया है कि इस्लामिक संविधान के प्रावधान को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यह इसके लिये बलों के प्रयोग को प्रतिबंधित करता है.

पाकिस्तान में एक स्कॉलर का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या समूह को जिहाद फैलाने के अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि आत्मघाती हमले इस्लामिक तालीम के खिलाफ हैं और इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए. इ

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